19 जुलाई 2009

आज तुझे कहती हूँ जिंदगी ...

चलते चलते कदम कुछ देर रुक गए

रुक कर पीछे मुड कर देखा तो

जवानीकी हँसी यादें थी और बचपनकी अठखेलियाँ भी ,

मैं मुस्कुराकर आगे चलता गया नए मकाम तक .......

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जिंदगी चलने का नाम है

हम रुक जाए वो तो चलती रहती है ,

घड़ी बिगड़ जाए तो वक्त नहीं रुकता ,

सहर से शाम का सफर तो चलता ही रहा है ......

3 टिप्पणियाँ:

  1. sahi...zindgee chalti rahti hai...peeche chhodh jaati hai boht si khatti meethhi yadein.....

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  2. घड़ी बिगड़ जाए तो वक्त नहीं रुकता ,
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    सही कहा है हमे वक्त के साथ चलना ही होगा

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  3. घड़ी बिगड़ जाए तो वक्त नहीं रुकता ,

    सहर से शाम का सफर तो चलता ही रहा है ......
    sahi farmaya,waqt kaha ruka hai kisike liye,subhah se shaam hoti hi hai.bahut khub.

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