27 मई 2009

तुझे देखा तो ये जाना....(हास्य कविता )

तुझे देखा अय चाँद कल रात

मुझे मेरा वो टकलू पडोसी याद आया ....

तुझे देखा अय सितारे चमकते हुए

मुझे जिसके सारे कंचे छुपा देती थी वो मन्नू याद आया ....

तुझे देखा अय मेरे महबूब

मुझे गाँवमें वो तंदुरस्त भैंस के रंग याद आया ,

तुझे देखा अय अश्क उसकी आँखोंसे टपकते ,

मुझे मेरे बाथरूम के हरदम लिक रहने वाला नल याद आया ......

तुझे देखा स्टेज पर गाते हुए कल रात

मुझे मेरी मोटर साइकिल के फटा सायलेंसर याद आया .....

तुझे देखा खिलखिलाकर हंसते हुए तो

मुझे वो काले दंतमंजन के इश्तिहार याद आया .....

तुझे देखा रहा हूँ आज यूँ चेहरा लटका हुआ लिए हुए ,

मुझे "९९ -देल्ही डेस्टिनी "सिनेमा का बोमन ईरानी याद आया ........

तुझे देखा आज बिना काला चश्मा पहने हुए तो

मुझे "सिंग इस किंग " सिनेमा का जावेद जाफरी याद आया .....

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