20 मई 2009

एक अजनबी ....

सूरज आया आज होठों पर लिपस्टिक लगाकर ,

मुझे वह अजनबी लगा ....

दोपहरमें धुप आई काले बादलका दुपट्टा ओढ़कर ,

मुझे वह भी अजनबी लगी ....

देखो मेरी सहेली ये जिसके साथ गिट्टे खेली थी अब तक ,

दुल्हनके जोड़ेमें वह भी मुझे अजनबी ही लगी .....

घरकी खिड़की से कांच तोड़कर जिसकी गेंद घरमें आती थी ,

वह हमजोली वातानुकूलित केबिन के अन्दर

कंप्यूटर पर उँगलियाँ रगड़ता हुआ

बड़ा अजनबी लगता है .........

चावल भी सफ़ेद की जगह गुलाबी लगे और हरी सब्जी लगी पिली

आज खाने की थाली में भी लागे मुझे सब चीजें अजनबी ....

समज न पाई ये क्या माज़रा है ?

अरे हाँ !!!कल रात सपनोंमें कल एक अजनबी से मुलाकात जो हुई थी .......!!!!

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