17 मई 2009

जानबूझ कर की गुस्ताखी तो .....

बस आज ये तय कर लिया हमने ,न सोचेंगे आज आपके बारेमें अब ,

ये दिल पर काबू नहीं हमारा इसी लिए उसे उसने सिर्फ़ आपको ही सोचा ...

खतावार ये ऐसा है फ़िर भी इसकी सज़ा न तय कर पाए कभी ,

इसकी नाफ़रमानी की गुस्ताखी हंसकर सहना भी सिख लिया है अब .......

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आज दिल में इतना दर्द क्यों हो रहा है ???

कुछ टुटा हो ऐसा क्यों लग रहा है ???

तब जाकर पता चला हमें इश्कका बुखार चढा था जो ,

आपके चप्पल पड़े जब तो ये उतरने लगा है .....

1 टिप्पणी:

  1. बस आज ये तय कर लिया हमने ,न सोचेंगे आज आपके बारेमें अब ,

    ये दिल पर काबू नहीं हमारा इसी लिए उसे उसने सिर्फ़ आपको ही सोचा ...achha likha...

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