16 मई 2009

कभी खुशी कभी गम .....

आज एक बार फ़िर मेरी जिंदगीके एक नियम एक फलसफे को बांटना चाहती हूँ :

हम जिंदगी में गम ज्यादा और खुशी की कमी क्यों महसूस करते है ?

=हम कोई भी काम करने से पहले उसके अपेक्षित परिणाम भी ख़ुद ही तय करते है ...हर काम का जो भी परिणाम होता है वह कई परिबल पर निर्भर होता है .हम सिर्फ़ एक कर्म वो भी पुरे दिल से कर सकते है .अगर परिणाम अपेक्षा अनुसार होते है तो खुश वरना सिर्फ़ शिकायत करते है और ढूँढते है बहाने की क्यों हम नाकामियाब है ?इस चीज़ को हम हर आनेवाले पलोंके साथ खींचे चले जाते है और इसी लिए हमारे लिए गम के पल होते है उससे भी अधिक नज़र आते है ....और खुशी का कोई पल मिले तो उसे भी घसीटते जाते है ..एक कामियाबी को इतना लंबा खींचते है की आगे बढ़नेके रास्ते ,अपने में और अधिक सुधार की गुन्जायिश कल्पना नहीं करते ...

वक्त के साथ जियो ..कोई पल कायम नहीं ..आज का गम कायम नहीं कल खुशी का रास्ता खुला ही है ...ये खुशी के पीछे अगर कोई गम आए तो बर्दाश्त करने की तैयारी भी है ...

मैंने जब कोई पोस्ट लिखती हूँ और देखती हूँ की जिसे मैंने अपने वजूद को निचोड़कर लिखा होता है वह लोगों को कम पसंद आई ..उस पल मैं सिर्फ़ ये सोचती हूँ शायद कुछ तो कमी है चलो अगली बार जरूर गौर करुँगी ..कभी कभी हलके फुल्के तरीके से लिखती हूँ जो बस यूँही लिखा होता है तो वह लोगों को बहुत पसंद आती है ...पर ये बात से परे रहेकर वह गम और वह खुशी उस दिन उस पल तक ही सिमित रखते हुए बस लिखती हूँ ...अगर लोगोंके विचारोंसे प्रभावित होकर मैं हताश हो जाऊं या लिखना छोड़ दूँ तो उसमे सबसे बड़ी नाइंसाफी तो मैं ख़ुद के साथ ही करुँगी ....

इस तरीकेसे जीना शुरू किया तबसे मेरी जिंदगी में खुशी के पल ज्यादा और गम को खुशी में तब्दील करने की चाबी हाथ आ गई ...संसारमें रहते है तो कहासुनी भी हो जाती है पर कुछ पल खामोशी के बाद ठंडे दिमाग से सोचते है और लगता है की गलती हमारी है तो बिना संकोच माफ़ी मांग लेते है ..और अगर सामने वाले की हो तो सोचते है की कितना प्यार है हम लोग में !!!!बस एक छोटी बात के लिए हम उससे नाराज़ हो गए !!! चलो माफ़ करदो ...उसे भी !!! और इस बात से रिश्ते की गहराई और बढ़ जाती है और वह अटूट हो जाता है ...ग़लतफहमी कम होती है ...खुशी ज्यादा और गम कम .......

एक फिल्मी गाना है जो मुझे बहुत पसंद है : फ़िल्म " जब वी मेट " का :

हम जो चलने लगे चलने लगे है ये रास्ते

हाँ मंजिलोंसे बेहतर लगने लगे है ये रास्ते .....

2 टिप्‍पणियां:

  1. आज की जिंदगी है भी कुछ ऐसी ...जिसे सुनाना चाहे ..वो कोई सुनता नहीं...!हमसे सब अपनी पसंद की बात सुनना चाहते है..तभी तो सब लोग अन्दर ही अन्दर घुटते रहते है.!.एक गाना भी है...कोन सुनेगा,किसको सुनाएँ ..इस लिए चुप्प रहते है...

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