15 मई 2009

मेरी प्रेरणा

जिसने मेरी धड़कनोंको सुना,

जिसने मेरे ख्वाबोंको सींचा,

हौलेसे खोले जिसने मेरे पंख,

मेरी कसकसे रोई जिसकी आँख,

कैद मुजे है कर लिया सलाखोंमैं प्यार की ,

फिर भी उडान संग उसके भरी मैंने खुले आसमानकी,

अय मेरे ख्वाब और उसकी ताबीर,

चुराके रख लिया है तुम्हे जहाँ से ऐसे ,

तुम्हारा नाम भी जबान पर न लाऊंगी......

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