14 मई 2009

शिकायत कर लो ......

दिलसे कुछ आहट आई ,

अरमानोने ली भली सी अंगडाई ,

उठती हुए खयालोंने शब्दकी एक शमा जलाई ,

और देखो उससे उठती लौने तेरी तस्वीर बनाई .............

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आँखोंसे बहा ये काजल गालों पर यूँ बिखरा ,

जैसे एक लटमें सिमटी काली सी रात चाँद पर निखर गई ......

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तेरे हुस्न को लब्जोंमें कैसे कैद करें हम ?

हर कैदसे आजाद सी खुशबू बन बहती है सबामें ..........

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हरदम शिकायत करते हो नींद नहीं आती ,

यादोंको समेटकर दामनमें नींदमें ही आप जगा करते हो .............

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