4 मई 2009

आज मेरे जनमदिन पर कुछ झाँका मैंने ...

वक्तके आयनेमें देख लूँ जरा

अब मेरे चेहरे का हाल क्या है ?

कितनी सिलवटे पड़ी है ? कितनी छुपी है ?

या कितने ज़ख्म भरे है ? कितनोंके निशां बाकी है ?

पलकोंमें जो सपने छूपे थे कभी

क्या वो आज भी आमादा है ?

या किरचें भी हो चुकी है उनकी ओज़ल ?

वो एक अज़ीज़ ख्वाब अभी है या है गुमशुदा ?

मेरे हाथोंमें लकीरें कुछ घिस गई है

मेरे बालों का रेशम थोड़ा खुरदरा हो चुका है ......

श्वेत झुल्फ़ की लड़ी झूल रही है रुखसार पर

नज़र के चश्मेके बगैर अब हर मंज़र धुंधला सा है ,

ये वक्त का तकाज़ा है ......

फ़िर भी दिल कहता है ....

अब भी हाथोंमें कुछ वक्त बाकी है ....

बस एक नए लम्हे सजा लीजे ....

समय के इस शामियानेमें फ़िर एक

नए ख्वाब का घरौंदा बना लीजे .....

8 टिप्‍पणियां:

  1. waah ....priti ji ,
    aaj to aapne bahut hi sashakt rachna rachi hai.........badhayi sweekar karein.

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  2. जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई...

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  3. bole to janam din mubarak ho......अब भी हाथोंमें कुछ वक्त बाकी है ....

    बस एक नए लम्हे सजा लीजे ....

    समय के इस शामियानेमें फ़िर एक

    नए ख्वाब का घरौंदा बना लीजे .....

    ye antim panktiyan aapki kavita ko or sarthak banati hai.....or rahi baat meri valetine ki...to aap se achha or kon ho sakta hai....so will u be mine valentine??? ha ha ha just kidding abhi tak koi nahi hai...!!

    Jai Ho mangalmay ho

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  4. मेरे हाथोंमें लकीरें कुछ घिस गई है

    मेरे बालों का रेशम थोड़ा खुरदरा हो चुका है
    जी,जनम दिन आता है तो कुछ जाता भी है....!खैर..छोडो...बधाई हो...

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  5. आप की जिंदादिली को सलाम...इंसान अगर चाहे तो कभी बूढा नहीं होता...जनम दिवस की शुभ कामनाएं.
    नीरज

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  6. Bahut hi sundar rachna hai aapki... aapko meri taraf se dhero subhkamnaye...

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