10 अप्रैल 2009

मैं सागर हूँ ...

मैं सागर हूँ ...ख्वाहिश लिए खुबसूरत दुनिया को देखूं ....

लहर पर सवार हो आता हूँ हर वक्त साहिल पर ...

ये नर्मसे रेतके रेशम जैसे दामन

पर फिसलकर फिर वापस चला जाता हूँ .....

दास्ताँ मेरी सुन क्यों तेरी आँखें हो गयी नम?

चख ले पलक पर आ ठहरे इस अश्कको ..
वो भी है मेरी तरह खारे ही ...
मेरी गहराई तेरी किस्मत कहाँ ?

ऊंचाईयोंको छू लेने की मेरी फितरत नहीं .....

2 टिप्‍पणियां:

  1. चख ले पलक पर आ ठहरे इस अश्कको ..
    वो भी है मेरी तरह खारे ही ...
    मेरी गहराई तेरी किस्मत कहाँ ?

    ऊंचाईयोंको छू लेने की मेरी फितरत नहीं .....
    waah jazbaton ka sailab,bahut hi khubsurat.

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