29 अप्रैल 2009

कुछ अनमोल पल .....सहेज के रख लूँ

आज कल स्कूलमें वेकेशन हो चुके है । ज्यादातर लोग अपनी जिंदगीमें बदलाव चाहते है । कहीं जाते है , रिश्तेदारोंके घर जाते है ...ट्रेकिंग या भ्रमण कुछ भी .... पर अपने ही आसपास की जिंदगीको देखने की किसीको फुर्सत नहीं होती है .....

मैं भी वेकेशन होते इस साल अपने मायके गई । वडोदरामें ही है । पिताजीने घर बदला था .नया घर .नए लोग ..नई जगह अपने ही शहरमें देखनेको मिली .तक़रीबन ४२ साल इसी शहर में गुजरे थे फ़िर भी ये जगह मैंने नहीं देखी थी । सुबह पिताजीके साथ मन्दिर जाना । और शामको बस यूँही चलने ....

वडोदरा जंक्शनके एक स्टेशन आगे एक छोटा स्टेशन पड़ता है । घर के थोड़े दूर से मुंबई जाने वाली ट्रेनकी पटरी थी । वहां पर साथ साथ ही एक छोटी सड़कके किनारे बैठने के बेंचेस लगे थे । वहां पर जाकर बैठते थे । जाती आती गाड़ियोंको देखते रहते थे । सामने ढलता सूरज का दृश्य लुभावना होता था । मैं और पिताजी बातें करते हुए इस प्रकृति का आनंद उठा लेते थे ... मुझे तो इन पलों में एक दिलकश जिंदगी नजर आती थी .... ट्रेक के पास बैठ कर देखे उन द्रश्य को मैंने कल कविताके रूप में उजागर किया था ........

ये तो रही मेरी बात ..पर आप कभी बिना कोई वजह ऐसी जगह जाकर बैठकर देखो .जाते आते लोगो को देखो । ये थोड़ा सा वक्त इस तरह गुजरने से भी आपका स्ट्रेस लेवल काफी हद तक कम हो सकता है । जरूरी नहीं की हिल स्टेशन पर जाकर ही छुट्टी बितायी जा सकती है ...

इस दौरान मैं एक छोटे से गाँवमें गई । वहां पर कच्चा घर था । गोबर मिटटी से बना हुआ । पर वहां पर ऐ सी से बढ़कर ठंडक महसूस हुई । ताजे खेत से लाये गए साग और बाजरे के मोटे मोटे टिक्कड़ को लकड़ीके चूल्हे पर बनाकर जब परोसा गया तो मुझे लगा की जिंदगीमें पहली बार इतना स्वादिष्ट खाना मैंने खाया है ...हरे भरे खेतोमें २ -३ किलोमीटर तक घूमते रहे ...शायद एक सुकून मिला ....शहरकी जिंदगीमें पैसा तो है ... एक आरामदाई जिंदगी तो है पर गांवके लोगों का भोलापन , सरलता ,मधुरता और प्यार की कमी है ......

जैसे की मेरे ब्लॉग का ही नाम रखा है मैंने हर पल यहाँ जी भर जिया कल ये समां हो न हो ...आँखों के सामने न सही पर मेरे मानस पट पर तो हमेशा के लिए अंकित रहेगा ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. मैं भी एक बार जा चूका हूँ उधर अहमदाबाद , राजकोट ...हमारे दादा जी रहते हैं वहां ..रेलवे में हैं .....अच्छे शहर हैं ...अच्छा लगता है उधर

    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  2. राजस्थान के गाँवों में घूमा हूँ. इसका अपना आनन्द है.

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