20 अप्रैल 2009

ये इश्क भी न !!!!

जख्म देता है इश्क टूटे जब दिल ,

फिरभी वह दर्द बन गया जीने की वजह ......

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आतिश है जो छुपी हुई आपकी नज़रमें

जलाकर खाक न कर दे इश्कमें हमें कहीं ........

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नजरमें गुमां, नजर का खुमार ,

नजरोंके मिलने पर नजराना पेश है दिल का .....

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