15 अप्रैल 2009

अकेलेमें यूँ मुस्करा दिए .....

आपके हाथोमें मैंने अपनी तक़दीरको पढ़ा ,
आंखोंमें देखी आपकी किसी और की थी तस्वीर ......

आपके ख़यालमें कुछ ये आलम था
अकेलेमें हम मुस्कुरा रहे थे .......

आपसे मिलकर क्या बातें करूँ ?
खयालोंमें कितनी गुफ्तगू कर चुके है आपसे ??!!

न कोई वजह है ,न मंजिल की तलाश
क्यों फ़िर बाँध जाती है आपसे मिलने की आस ???

न मिल पाएंगे अब कभी किसी मोड़ पर
तय था ये फ़िर भी इस पल में क्यों जीना चाहा ??

उम्रभरका साथ तो न मांग सके हम
बस इस पलमें पूरी उम्रको जिन्दा कर लिया .......

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