14 अप्रैल 2009

खामोशसे लब्ज़

यादोंके घरौंदेमें वो पल पनप रहे हैं ,

जहाँ आपके दीदारकी ख्वाहिश जमीं है ...

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क़दमोंमें लगी उस गर्दमें कभी

वतनकी महक भी कभी तो आती होगी ......

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आपसे क्या तार्रुफ़ हुआ की मिले हम जिंदगीसे ,

क्या कहे ? तारीफ़के लब्ज़ भी खामोश रह गए .....

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपसे क्या तार्रुफ़ हुआ की मिले हम जिंदगीसे ,

    क्या कहे ? तारीफ़के लब्ज़ भी खामोश रह गए .....
    waah lafzon ko hi khamosh kar diya,bahut sunder bat keh di.

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