शुभ्र सुमन पर बैठी एक तितली ,
जैसे जिंदगी को जिंदगी थी चूम रही ......
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आकाश और धरती का दूर क्षितिज पर मिलना ,
चंद रूपों के टुकडोमें सुखी होने का एक भ्रम .....
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तितलियोंको युनिफोर्म पहनाया ,
फूलोंको स्कुलबैग थमाया ,
देखो देखो हमने इस दुनियाको
डिसिप्लिनमें रहना सिखाया .........
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बहुत बढिया!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभ्र सुमन पर बैठी एक तितली ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंजैसे जिंदगी को जिंदगी थी चूम रही
waah bahut sunder
तितलियोंको युनिफोर्म पहनाया ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंफूलोंको स्कुलबैग थमाया "
बेहतर सोच । रचना रुचिकर लगी । धन्यवाद ।
अलग सा अंदाजे बयां है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन अन्दाज़
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