2 अप्रैल 2009

जिंदगी से मिलो

शुभ्र सुमन पर बैठी एक तितली ,

जैसे जिंदगी को जिंदगी थी चूम रही ......

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आकाश और धरती का दूर क्षितिज पर मिलना ,

चंद रूपों के टुकडोमें सुखी होने का एक भ्रम .....

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तितलियोंको युनिफोर्म पहनाया ,

फूलोंको स्कुलबैग थमाया ,

देखो देखो हमने इस दुनियाको

डिसिप्लिनमें रहना सिखाया .........

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5 टिप्पणियाँ:

  1. शुभ्र सुमन पर बैठी एक तितली ,

    जैसे जिंदगी को जिंदगी थी चूम रही
    waah bahut sunder

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. तितलियोंको युनिफोर्म पहनाया ,
    फूलोंको स्कुलबैग थमाया "

    बेहतर सोच । रचना रुचिकर लगी । धन्यवाद ।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं