27 मार्च 2009

एक साज़ एक आवाज .....



दिलके तहखानेमें आज कुछ ऐसे जाना हुआ ,
गर्दसे लिपटी सिमटी एक कोनेमें ,
वो भुलाये वक्तकी दहलीजमें ,
एक खामोश दिलरुबा का पाना हुआ .....

अंगुलीको छू जानेसे उसके तारको
जैसे सारे सूर आजाद हो गए .....
पहले प्यार की तरह छुपकर बैठे
सारे तराने फिजाओंमें बह चले .......

3 टिप्‍पणियां:

  1. अंगुलीको छू जानेसे उसके तारको
    जैसे सारे सूर आजाद हो गए .....
    पहले प्यार की तरह छुपकर बैठे
    सारे तराने फिजाओंमें बह चले
    wah sunder ehsaas

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