28 मार्च 2009

छोड़ आए हम वो गलियां ..??!!!


देखो मैंने एक रुपहला चांद्का खेत बनाया है,
उसमें एक टोफीका पौधा लगाया है,
ये देखो रेत का नहीं आईसक्रीमका पहाड बनाया है,
और सूरजको इसका पहरेदार बनाया है......

इन सितारोंके कंचे बनाकर आज खेलते है,
और मम्मीके बेलनसे रोकेटकी गिल्ली बनाकर टुल्ला मारते है,
दुनियाके लट्टू पर सपनोंकी डोर लपेटकर इसे गोल गोल घूमाते हैं,
मम्मी जब आवाज लगाये तब छत पर जाकर छूप जाते है......
( हमारी गिल्लीसे पडोसीकी खिडकीका कांच जो टूटा है...)

मेरी गुडीयाकी सोनियाके गुड्डेसे आज शादी तय की है,
भूने चने और चीनीका हलवा बना लेते है,
गुड्डेको नया पाजामा और गुड्डीको नई चुडिया पहनाते हैं,
आप भी आओ इस शादीमें शामिल होने और हलवा खाने............

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब! बचपन याद दिला दिया\ जब मैं स्कूल जाता था तो दो किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था देवदार के घने जंगल से और मैं और मेरे सहपाठी मित्र जो मेरे साथ ही स्कूल जाते थे, हम जंगल में छुप जाया करते थे और छुट्टी के समय घर चले जाते थे,,,,हुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र,,,,,,क्या दिन थे वो भी.......... आपको अच्छी कविता के लिए बधाई!

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  2. सून्दर प्रयास। बहुत बहुत बधाई

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  3. PLEASE PROMOTE IT ON YOU BLOG CREAT AWARENESS



    मै अपनी धरती को अपना वोट दूंगी आप भी दे कैसे ?? क्यूँ ?? जाने





    शनिवार २८ मार्च २००९समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेघर मे चलने वाली हर वो चीज़ जो इलेक्ट्रिसिटी से चलती हैं उसको बंद कर देअपना वोट दे धरती को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लियेपूरी दुनिया मे शनिवार २८ मार्च २००९ समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेग्लोबल अर्थ आर { GLOBAL EARTH HOUR } मनाये गी और वोट देगी

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  4. kalpna bhi kabhi kabhi achhi lagti hai or waise bhi ye to sachhi kalpana hai ...jo such hai...!!

    Jai Ho Mangalmay HO

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  5. बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने , मुझे तो पसंद आई.

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