16 फ़रवरी 2009

चलो प्यार का खुमार था उतर गया.....

एक बात निगाहोंके इशारों में थी ,

एक बात लब्जोकी नजाकत में थी ,

एक बात खामोश जज्बातोंमें थी ,

पर याद नहीं आ रहा वो बात क्या थी ?

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कल शाम उनसे आंखों आंखोंमे गुफ्तगू हो गई ,

शायद सोये नहीं होगे मेरे ख्यालों में रात भर तो आँख उनकी लाल हो गई ,

दूसरी सुबह जब चेहरे को ख़ुद के देखा तो राज़ पता चला लाल आंखोंका ,

हमसे नजरे मिलकर हमें conjuctivitis देकर चली गई ......

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