12 फ़रवरी 2009

चलो फ़िर आया एक प्यार का मौसम .....



प्यारकी बसंत बहारमें एक दिलकश मंझर पर ये दिल खड़ा है ...

सामने गुलिस्तान खिला है ,बाहर लिखा है अंदर आना मना है ......

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शर्तों पर किया गया था ये प्यार एक बार ,

उन शर्तोंने ही तोडा था मेरा दिल बार बार ,

माँगा था ,चाहा था उनकी वफ़ा को हरदम ,

पर दे न सके हम प्यार का लम्हा एक बार .........

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ये हाथ में है एक लाल गुलाब ,

ये आंखोंमें है किसीका इंतज़ार ,

ये राह जा रही है उनके घर तक ,

ये लबोकी चाहत है कर दूँ आज प्यार का इज़हार .......

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प्यार का मौसम आया है तो

एक प्यारी सी गुस्ताखी हमें भी करने दो ...

तनहा खड़े रह कर एक दरख्तकी छाँवमें ,

निगाहोंसे हमें उनको प्यार करने दो ........

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आज तुम्हे मैं क्या नाम दे दूँ ?

कह दूँ ये दोस्ती है या इसे प्यार का नाम दे दूँ ?

कशमकशमें दिल उलज कर रह जाता है ,

चाहत है कदमोंमें आपके आज मेरा ये दिल रख दूँ ........

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2 टिप्‍पणियां:

  1. ये हाथ में है एक लाल गुलाब ,

    ये आंखोंमें है किसीका इंतज़ार ,

    ये राह जा रही है उनके घर तक ,

    ये लबोकी चाहत है कर दूँ आज प्यार का इज़हार .......
    gehre bhav,ijhaar ho hi jaye ab,phir ye rumani hawaye aayena aaye,har sher lajawaab.

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