7 फ़रवरी 2009

पैगाम भेजा है जब हमने ......


नजरें मिली जब नजरसे तो कुछ यूं नजारा हुआ.....

नजरके उठते ही नजरके मिलते ही चराग ए मोहब्बत जल उठे,
महफिल दिलोंकी उन शमाओंसे रोशन हुई...
शर्मों हया से बोझल ये नाजुक पलकें जुक गई जब नजर नजरसे यूं टकराई थी,
झुकते ही नजर हयाकी यूं हवाएं चली ,शर्मोंसार हम होते रहे नजर जमींमें गाढकर...
ये नर्मों नाजुक होठों पर कुछ अफसानें आने लगे, पर शब्द रुके रहे जबां पर ही,
मेरी तेज धडकनोंकी अनसुनी आवाज गूंजती रही फिजाओंमें.....

एक पयगाम भेजा नजरने नजरको और वादा ले लिया उससे,
रात ख्वाबोंमे फिर मिलनेका.................................

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माहताबको देखकर आपने दागका जिकर फरमाया था शायद,
नजर बदलकर देखीये इस माहताबको, ये दागसे ही वो ज्यादा खूबसुरत लागे हैं....
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उनके आनेकी आहटके अहसाससे धडकनें तेज हो गयी,
विसाले यार होने पर ये नाचीज दिल धडकना ही भूल गया.......
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