2 फ़रवरी 2009

आओ आसमान को छू ले .............



चलो आज मुझे मेरा आसमां दे दो ...


उड़ते रहनेकी ख्वाहिश अभी बुझी नहीं है ,

प्यास अभी एक बूंदकी बाकी रही है अभी ,

मेरे लिए ये जमीं काफ़ी नहीं

अभी तो पूरा आसमां बाकी है ...............


एक मुठ्ठीमें छुपा है मेरी

बादलके दो बूंदोंके बीच छुपकर बैठा है वह ......


भीनी महक लिए लिपटकर बैठा है बूंदोंमें

जमींमें मिटटीके दो जर्रोंके बीच सिमटा है वह ......


अपनी गोदमें एक तिनके को बिठाकर

झुला झुलाए सातवें आसमां तक वह ........


दिल के मकानमें झांक लिया तो

पलते -पकते तो कभी थकते रिश्तोंके बीच प्यार बनकर

जिंदगीको हमेशा सहलाता दीखता है वह ........

3 टिप्‍पणियां:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...