30 जनवरी 2009

शहीद दिन :३० जनवरी



सुलगती सांसोसे आंखो में तपिश छा गई है ...

दिल टूटने का गुमां है ये की अश्कों की टूटने पर बंदिश आ गई ॥

आज फख्र है तुम्हारी जिंदगानी पर जो एक उम्दा मिसाल बनी ...

कायम रहेगी यहाँ की सरजमीं पर दास्ताँ जो तुने खूनसे लिखी ॥

चैनकी नींदे बख्शते रहे तुम अपनी रातोंकी नींदे कुर्बान कर ,

नत मस्तक होता है हमारा शीश अय सरहद के रखवाले ....

फिरभी जलन है एक दिल में!!

जान तक फना कर गए जिस पर ,

कुर्बानी तुम्हारी समज पाने को तख्त नशीं लोग लायक भी है ???

बुलेट प्रूफ़ बख्तर को सजाकर छाती पर रक्षकों से घिरे निकलते है बाहर ,

हमारी आजादी की रक्षा क्या इन कायरों के हाथों में है ??

अपनी तिजोरी को भरने के लिए वो तुम्हारे कफ़न भी बेच आयेंगे ,

अपने स्वार्थ की ताक पर वो तुम्हारी लाश का भी सौदा कर जायेंगे ....

बारूद के गोले भी शरमाते है जिनकी सौदेबाजी की करतूतों पर ,

क्या करे ये कलम बिचारी ?

जो अकेले में यूं कागज़ पर रो लेती है .....

हम भी मजबूर है पर क्या करें ??

तुम्हारी तरह सैनिक बनने को हमारा दिल भी करता है ,

पर मल्टीनेशनल में पगार वहां से ज्यादा मिलती है ...

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या करे ये कलम बिचारी ?
    जो अकेले में यूं कागज़ पर रो लेती है .....

    बेबसी है मगर इसी से होकर राह निकालनी होगी. स्वागत गांधीजी के विचारों पर आधारित मेरे ब्लॉग पर भी.

    (gandhivichar.blogspot.com)

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  2. बहुत सटीक व उम्दा रचना लिखी है।

    गाँधीजी की पुण्य तिथि पर शत शत नमन।

    उत्तर देंहटाएं

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