6 जनवरी 2009

ये निगाहों का जादू ...

अंदाजे बयां कुछ अलग ही रहा अपना ,

स्याही लहराती रही है सुर्ख कागज़ पर ,

हँसी लहराती रही है इन लबों पर ,

खुशी और गम को जब एक ladi me पिरोया हमने ....

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जख्मों को देने से ये दुनिया कभी बाज नहीं आएगी ,

रो दोगे तुम जितना उतनी ही हँसे जायेगी तुम पर ,

बस एक बार सिख लोगे मुस्कुराना मेरे साथ ,

फ़िर दोबारा रुलाने वो कभी नहीं आएगी .....

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छलकती खुशियोंका लब्जों से इज़हार न कर पाये ,

लब खामोश ही रहे पर ये निगाहें बोल पड़ी ,

नजर से नजर कुछ यूँही मिली पल भर तो ,

हया से झुकी पलकोंकी ताबीर मेरे दिलमे तस्वीर बनकर रह गई ....

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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लगा आपका अंदाजे बयां

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  2. जख्मों को देने से ये दुनिया कभी बाज नहीं आएगी ,
    सुंदर पंक्तियाँ. आभार.

    उत्तर देंहटाएं

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