16 दिसंबर 2008

लिबास




एक नन्ही सी परी है ॥

वो भी रात में परियों से बातें करती है ...

खुली खिड़की से सितारों की कलम बनाकर ...

चाँद पर जाकर कुछ अल्फाज़ लिख देती है ....

हवामें तैरते ऐसे ही गुलज़ारसे निकले अल्फाजोंको ,

तब वह भी पढ़ लेती है ....

अपनी कल्पनाओं के पर उनके दिल से जोड़ लेती है ....

ये सभी तो एक खामोशीका ही आलम है ॥

जहाँ सिर्फ़ दिल धड़कते है !!!!

और धड़कन बन जाती है अल्फाज़ ....

कभी शायरी कभी कविता का लिबास पहनकर आते है ..!!!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sahi kaha aapne..... likhte rahen....mere blog par bhi padharen....
    Jay Ho Magalmay Ho...

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  2. बहुत खूबसूरत
    बोलती हुए कविता
    आपके शब्दों का संसार काबिले तारीफ़ है

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया!

    ---------------
    चाँद, बादल और शाम
    http://prajapativinay.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं

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