27 दिसंबर 2008

बाँट ली तन्हाईयां कभी .......




आज तन्हाईमें बस यूँ ही वक्त गुजारना था ,

चाहते थे न कोई आस पास हो ....

तुम्हारे साथ बात करनी थी यूँ ही अकेले में ,

बस मैं हूँ और मेरी तनहाई हो ....

फ़िर भी तुम्हारी वह यादें हमें घेरने आ गई ,

तुम कहीं भी पास न थे मेरे ,

फ़िर भी एक अश्क का बूंद आंखों को दे गई ,

यूँ तुम्हारे खयालने हमें रहने न दिया था तनहा .......

तुम हो और हम है ,

बिल्कुल यूँ आमने सामने ही ,

थोडेसे खोयेसे थोड़े से खयालोंमें ,

अब दोनों ही अकेले है पर तनहा नहीं ........

3 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल यूँ आमने सामने ही ,

    थोडेसे खोयेसे थोड़े से खयालोंमें ,

    अब दोनों ही अकेले है पर तनहा नहीं ........

    bahut achhe bhav bahut khub badhai

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम हो और हम है ,

    बिल्कुल यूँ आमने सामने ही ,

    थोडेसे खोयेसे थोड़े से खयालोंमें ,

    अब दोनों ही अकेले है पर तनहा नहीं ........

    wahhh kya baat hai aapki puri kavita padi laga mano ek ...ek ehsas ko shobdon main doboya ho ??
    Tell me who can u express ur feelings like this...?? but love most last four lines...!!!
    hey yes i always remember our conversation it was good experience for me....thanx....

    Naya Saal Aapke liye Shubh HO .....
    Jay Ho Magalmay HO

    उत्तर देंहटाएं

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