23 दिसंबर 2008

जिंदगी का ये सफर ......



जिन्दगी की पहली साँस ढूँढती है जिन्दगी भर जिसे ,

और अन्तिम साँस पर मिलनेवाली उस महबूबा का नाम है मौत...


जीवमात्रकी धरती पर आने की रीत भले हो एक ,

मौत को गले लगानेके नुसखे है अनेक .......


बंद पड़ता है दिल किसीका या कभी दिल का दौरा बनके आती है ,

कोई खींचता है जिन्दगीकी रस्सी सौ साल कभी भरी जवानी में मौत आती है ......


किसीको खुद भगवानही देता है तो कोई अपनेको ही मिटाता है ,

ज़हर लेता है कोई तो कोई रस्सीके फंदे से लटक जाता है .......


कोई पटरी पर सोता है तो कोई जल की जगह अग्नि से स्नान करता है ,

अरे यह लोग तो मिटाते है अपने आपको ही न ?

कमी नहीं यहाँ उन लोगोकी जो दूसरों की ही जिन्दगी मिटाते है..


कोई सुपारी लेता है तो कोई चाक़ू छुरी पिस्तौल चलाता है ,

कोई rocket लौचरोंसे अनजानो की जान लेने पर बन आता है ......


उन वहशी दरिन्दो का एक दो से पेट नहीं भरता ,

वे तो सैकड़ों की जिन्दगी तबाह कर जाते है .....


बिगड़ी हुई ब्रेकवाले पहिये किसीके दुलारे को कुचल डालते है ,

दहेज़भूखी समाजकी तासीर किसीको दुलारीको जिंदा जलाती है......


यह समाज यहीं नहीं रुकता ,बढती आबादी के नाम पर अब ,

स्त्री भ्रूण हत्या भी सरे आम की जाती है ......


जिंदा लोगोंकी जरा फितरत तो देखिये,

दूसरों की मौत पर मिली छुटी मनाते है ,

दुर्घटना की लिस्ट में कंही नाम न हो अपनों का यह दुआ मांगते है

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जिंदगी तुमको जिन्दगी ही समजा हमने और तहे दिल से जीते रहे ,

हर मुश्किलों को धुंए में उड़ाकर चलते रहे ......

खौफ हमें मौत का रहा नहीं कभी क्योकि ,

हक़ीकत यह जिन्दगीकी हम गले लगाकर चलते रहे.....

नियामत है यह जिन्दगी जिसकी वह नाखुदा की इबादत करते है ,

अय जिन्दगी तुम्हे मुश्किलों में भी जिया करते हैं .....

उफ़ न करेंगे जब मुश्किलों से होगा सामना मेरा ,

तुम्हारा दिया ये तोहफा हम प्यार से कुबूल करते हैं .....

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छा िलखा है आपने । बधाई । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है- आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो पढें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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