22 दिसंबर 2008

मेरे जागने का इंतज़ार कर रही थी .......



रातमें हमने चाँद और सितारोंकी जगमगाती दुनिया देखी थी ,

सुहानी दुनिया थी रंगबिरंगी ख्वाबोंसे भरी हुई थी ,

सुबहमें सूरजने हमारा माथा चूम लिया प्यारसे और जगाया ,

देखा तो ख्वाबोंसे भी सुंदर दुनिया मेरे जागने का इंतज़ार कर रही थी ..........


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क्यों ऐसा लगता है कोई देखता है हमें हरदम ?

क्यों ऐसा लगता है कोई रहता है आसपास हरदम ?

क्यों ऐसा लगा की किसीने गिरते हुए संभाल लिया हमें ?

क्यों ऐसा लगता है किसीने दर्दको हमारे गले लगा लिया प्यारसे ????


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