5 जून 2012

जाने क्या सोचती है निगाहें तेरी ???

जाने क्या सोचती है निगाहें तेरी ???
हर दम जैसे एक नया ख्याल बुनती रहती है !!!
इन ख्वाबोंके ताने बानेमें उलाजके रह जाती है बेताबियाँ ..
और इंतज़ार काजल बनकर रुक जाता है 
नयनकी देहलीज पर ...!!!
उसकी गहराईकी कोई जुबाँ नहीं ,
न आती है कोई भाषा उसे ...
बस ख़ामोशीसे वो तकती है चेहरा मेरा ..
और मेरा ये नादाँ दिल ..!!
और मेरा ये नादाँ दिल ....
बस एक धड़कन चुक जाता है ,
और फिर तुम्हारे लिए धडक जाता है !!!!
जाने क्या सोचती है निगाहें तेरी ...
बस वो सोच मैं बन पाऊ ये जर्रानवाजी कर दे  शायद !!!!!

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