18 मार्च 2016

कुछ गुजरी यादें ,

कुछ बीते दिन ,
कुछ गुजरी  यादें ,
कुछ टीस  कुछ हंसी  ,
सब बेमानी से लगते है ,
 ये जिंदगी रोज
 एक नया पन्ना खोलकर बैठती है ,
रोज ये चाहत होती है उसे कोरा छोड़ने की  ,
मैं मुंह फेर के बैठती हूँ  ,
दूसरे दिन वहां मेरी उदासी लिखी होती है  ...
ये वक्त अपनी कहानी लिखने आता है  ,
ये किस्मत उसे चलाती  होगी  ,
जिंदगी तो मेरी होती है  फिर भी  ,
वहां मेले लगते है जो मेरे होते हुए भी
कभी कभी अजनबी लगते है  ...
अफ़सोस या ख़ुशी के परे  एक जहाँ होता है  ,
मेरा मक़ाम अब शायद वहां होता है  .....

11 मार्च 2016

कभी कभी ये जिंदगी !!!

एक नदी गुजरती है ,
पथरीले पहाड़ों से ,कंटीली राहों से  ....
रौशनी का सैलाब लेकर रोज चलता है सूरज
कितना ज़ुलसता और सुलगता है दिन भर !!!!
न दिखती ये हवाएँ भी टकराती है किस किस जगहोंसे !!
कभी आग से गुजरती  है कभी बर्फीली वादियों से  ....!!!
एक नज़्म भी गुजरती है कलम से कागज़ के सफर में  ,
कितने कितने मक़ामसे उस गली से
जिसका नाम कभी ख़ुशी के गली है
या है फिर दर्द का शहर !!!!....
बस्ती से विरानो से हर मोड़ से पहचान है उसकी  ,
बस खुद से पहचानना भूल जाती है कभी कभी ये जिंदगी !!!

10 मार्च 2016

मतलब की....

सुना था हमने धरती को पानी की प्यास होती है ,
क्या हुआ ऐसा की ये अब खून से सींची जाने लगी ?????
पहले इंसान ही था की गाय को रोटी और पंछी को दाना देता ,
अब गरीबों के हाथ से भी रोटी छीनी जाने लगी ???
पहले तो किसी के दर्द में साथ बैठ कर हल ढूंढा जाता था ,
अब दुःखमे साथ देने के लिए कंधे की नाकाम कोशिशें की जाने लगी ???
पहले जिंदगी की किताब खुली रहा करती थी ,
अब उसे पासवर्ड से लोक की जाने लगी ????
कभी इंसान इंसान की तारीफ पीठ थपथपा कर किया करता था ???
अब तो फेसबुक पर सिर्फ लाइक्स से पहचान की जाने लगी ???
एक भुलावे में जीने लगा है आज का इंसान ,
देखो कितने सारे लोग मुझे जानते है मुझसे बतियाते है  ,
ये भरम पाल कर रखता है हरदम  ,
सच में तो एक कमरे में मुठ्ठी में कैद मोबाईल में ख़ुशी ढूंढी जाने लगी ???


27 जनवरी 2016

हेलो ....... !!!

आसमानोंमें जम रही थी हवाएँ ,
बर्फ बनकर गिर रही थी रुई सी  ....
वो अंगीठी की तपिश से खुद को
गर्म करने की नाकाम कोशिशें
बदनमें सिरहन बनकर उमड़ रही थी  ....
आसमान चुप था  ,
जुगनू बैठ गए थे छुपकर  ,
रातका वो मध्धम संगीत भी सो रहा था  ,
चाँद खोज रहा था बादलों का दुशाला  ,
सितारों को ये ख़ामोशी अच्छी लग रही होगी शायद
इसी लिए वो सारे वैसे ही टीम टीमा रहे थे  ...
ऐसे में मेरे फोन का बजना
और धीरी आवाज से वो तुम्हारा कहना
हेलो  ....... !!!

6 जनवरी 2016

परायी अमानत

बेटी तू तो परायी अमानत है  ,
तू जहाँ ब्याह कर जायेगी वो ही तेरा घर  .. 
माँ बापू से ये सुना हरदम  ... 
माँ तूने जन्म दिया और बापू ने पढ़ाया  ,
क्या ये मेरा घर नहीं है ????
ब्याह करके बिदाई के वक्त :
माँ बोली ये तेरा नैहर है बिटिया अब से 
अब तू अपने घर जा रही है  ..... 
सास कहे अब परायी जनी  
क्या जाने इस घर के रस्मो रिवाज सब ???
मारन ताडन से दम घुंटता है 
तो क्यों नहीं जाती अपने घर वापस ???
मेरा घर कौनसा ???
मैंने एक नौकरी ढूंढी है  .... 
अब अपनी कमाई से मैं एक घर बनाऊँगी  ... 
वो मेरा घर होगा जहाँ कोई मुझे नहीं कहेगा :
चली जा अपने घर  ... 
तू तो परायी अमानत है  ,ये घर भैया का है  ..... 

17 दिसंबर 2015

रुखसत

वो बदगुमां नहीं ,वो बे हया  नहीं ,
पर बेरहम हो सकते है  ....
प्यार से उनका न रहा हो  इत्तेफ़ाक़
ये मुमकिन हो सकता है  ....
पर वो किसीका प्यार बने वो मुमकिन है   ....
चाँद और तारे रातों में नज़र आते है  ,
गौर फरमाइए जरा , तवज्जो भी दें  .....
चाँद और तारे रातों में नज़र आते है अक्सर   ...
पर इस चाँद के दीदार से मेरे हर दिन का आगाज़ होता है  ....
वो कहते है तुम्हारी किस्मत की लकीरों में हम नहीं  ,
उन्हें क्या पता  ...की उन्हें क्या पता है  ???
हमारे पास तो हथेली ही नहीं  .....
क्या कहूँ बस आवाज को बनाकर अपना संदेसा  ,
मैंने महफ़िल में गाई  एक नज़्म  ,
उन्होंने मुझे देखा भी कनखियोंसे  ,
बस हाथ पर दुशाला ओढ़े कसीदे जो मैंने पढ़े  ,
लब्ज़ोंने किस्मत लिख दी थी मेरी
जो न हाथोंमे  थी न लकीरों में  .....
तेरी यादों से वाबस्ता कभी तनहा न हुए हम   ....
तेरी डोली को भी रुखसत करने आये थे हम  .... 

7 दिसंबर 2015

इतिहास

खुद की तस्वीर देखकर हैरान हूँ  ,
ये ज़ुर्रियाँ  कब लिखने लगी दास्तानें
चहेरे के कागज़ पर बिना इजाजत के ??
मुझे पूछा तो होता चहेरा जो मेरा है तो !!!
ज़ुर्रियोँ में बैठा वक्त मुस्कुरा रहा था
कह रहा था मैं वर्तमान हूँ  ,
तुम किस गलीमें जवानी की गुमशुदा हो ???
तो खिड़की खोली मैंने अपने कमरे की  :
देखा :
वो घर सारे नया कलेवर लिए खड़े है  ,
वो दो मंज़िला ईमारतें आसमाँ से गुफ्तगू में व्यस्त ??!!
रास्ते थोड़े वजनदार हो गए है तो चौड़ी जगह उन्हें भी चाहिए !!
अब ये छोटी सी जगह लोग शहर के नामसे जानते है  ,
रेलवे स्टेशन पर भी नाम के साथ जंक्शन जुड़ा है  ..
तब ऊपर से हवाई जहाज गुजरा  .....
आसमान पर हमारे साथ दौड़ने पर निशान फिर नजर आये  ,
क्या ये वर्तमान है ???
वो हमारी जवानीने पैदा किया है  ,
इस की परवरिश में हम बूढ़े हो गए ????
बस जुर्रियों ने हंस दिया हम पर  ...
कहा :
कुछ नहीं नया ये ,इतिहास खुद को दोहरा रहा है  .. 

18 नवंबर 2015

औरत : तेरी कहानी (9)

घर लौटे तो लड़के ने ही बोला की मैंने इसे एक सप्ताह का समय दिया है सोचने के लिए  . और उसके बाद ही जवाब देना  . माँ के चहेरे पर चिंता की लकीरें थी  . लड़का मुझसे काफी बड़ा था  . और एक पत्नी बनने के बाद घर की जिम्मेदारीके साथ कॅरियर में ऊंचाई को छूना मुश्किल तो बन ही जाता है  . मुझे दीदी के कर्म की सजा मिलनी थी  . और लड़की के जन्म की सजा भी भुगतनी थी ये शादी करने के बाद  . मैं जानती थी की शुरुआत में तो सब अच्छे से ही पेश आते है पर मेरे शौक के कारण  घर पर देरी से लौटना  , पुरुषों के साथ व्यावसायिक संपर्क में रहना एक पुरुष के इगो को बहुत समय तक रास नहीं आ सकता  . फिर खानदान की इज्जत को बीच में लाया जाता है  ,और संतान को जन्म तो औरत के जन्म को पूर्ण करने के लिए देना ही पड़ता है  .
सोच विचार में आज छः दिन तो चले गए  . कल जवाब देना था और पापा तो हाँ ही बोलने वाले थे  .
शाम को कॉलेज से लौटते वक्त मेरा एक्सिडंट हो गया  एक ट्रक से टकराई  . मेरे दांये पैर में चोट आई और मुझे हॉस्पिटल में दाखिल कराना  पड़ा  . मैंने भगवान का शुक्रिया किया की बात टली  . पापा ने उस लड़के को फोन करके हकीकत बताई  . एक सप्ताह के बाद जब मैं लौटी तो मुझे पूर्ण तरीके से ठीक होने के लिए लकड़ी के सहारे एक साल तक चलने की हिदायत दी गयी थी  . मैं बेहद खुश हुई  . इस के अलावा दूसरी कोई प्रॉब्लम नहीं थी  . मेरी माँ ने इस दौरान पापा को समजाया  की आपके इस फैसले के कारण  मेरी ऐसी हालत हो गयी  . पापा का रुख थोड़ा नर्म हुआ  . दादी ने तो उस लड़के के कदम को ही गलत ठहराया  … बदशगुनी करार दिया  .
एक हफ्ते बाद वो रियालिटी शो की शुरुआत होनी थी  .
रात मैंने पापा से कहा : पापा , मैंने संगीत की इतनी आराधना की है  और वो शो एक हफ्ते में शुरू होना है  . एक साल तक तो शादी होने से रही  . तो फिर मुझे जाने दो न !!! वहां तो स्पर्धकों का पूरा ख्याल रखा जाता है  . अच्छे होटल्स में ठहराया जाता है  . मुझे जाने की इजाजत दोगे  तो मैं ताउम्र आपकी शुक्रगुजार रहूंगी  .
पापा कुछ नहीं बोले  . उठकर अपने कमरे में चले गए  .




9 नवंबर 2015

दिवाली …

कुछ कहती है दिवाली
कुछ सुनती है दिवाली
अंधेरो के घेरे में पनपती है दिवाली  .
रौशनी का मोहताज नहीं कोई ,
खुद के अंदर के दीपक को उजागर करो ,
तो रौशनी से जगमगाती है अस्तित्व को  …
चाँद भी अदब करता है उस उजालों का  ,
तब तो सितारों की संगत में
पनपती है दिवाली   …
किसीके दिए में आँसू का तेल न हो
उस आँखों को ढूंढ कर देखो रौशनी में  ,
एक हास्य का लास्य भर दो उस चहेरे पर
वो ही सिखाने के लिए आती है दिवाली   …
रौशनी का मतलब सीखो दिये से  ,
खुद को जलना पड़ता है
अंधेरों से लड़ना पड़ता है  ,
उम्र दिए की भले ही हो एक रात की  ,
उस दिन को   हर साल मनाना होता है   ....
रंगोली के रंग से रंग चुराकर मिठास को
अपने हृदयमें बसाकर   ,
पटाखों की चमक और आवाज से
पुरे साल के इंतज़ार के बाद आती है दिवाली   ....
हर  इंसानों के लिए शुभकामना का प्रतीक
बन इंसानियत को जगाती है दिवाली  .... 

4 नवंबर 2015

नीले आसमानों पर

ख्वाबों के नीले आसमानों पर
हसरतें लिख रही है कुछ दास्ताँ अनकही सी  .
रातों को नींद बैरी बनकर ठिठोली करती ,
मेरे कमरे से दीखते चाँद को दिखाकर
चिढ़ाती  है मुझे अक्सर  ....
चाँद देखकर मुझे हौले  मुस्कुराया ,
मैंने भी उसके इस्तकबाल  के लिए
 एक नज़्म को धीरे से गुनगुनाया   …
मेरी और चाँद  गुफ्तगू बस चल रही थी
और पीछे से  हसरतने आवाज लगायी
वो  नूरानी हयात बनकर सामने खड़ी थी  …
मैं और चाँद दोनों बूत बने देखते रहे
और सुबह हो गयी  ....