8 फरवरी 2012

तन्हाई कहाँ से लाऊं ????

न वो राह तकती है मेरे लिए ,
न वो खिड़की भी खुलती होगी मेरे लिए ,
आबादीसे दूर एक खंडहरमें 
मेरे कदमोके निशाँ वो आकर चूमती होगी .....
वो खलिश ,वो तपिश आज कहाँसे लाऊं ?
जो बुझ चूका है वो दिएकी लौ कहाँसे लाऊं ?
बस बिक चुकी ज़मानेके हाथो चंद   रुपयोंके लिए ,
वो मेरे बचपनके घरकी ईंट कहाँसे लाऊं ???
आज वो पेड़ और पौधे मेरे इंतज़ारमें है ...
आज भी टूटे हुए झूले पर कोई तो आकर झूलता ....
बस आज शिकायत इतनी है की 
वो सारी यादोंको फिरसे जीने के लिए 
तन्हाई कहाँ से लाऊं ???? 

7 फरवरी 2012

दिल झुकता है किसीकी तरफ

दिल झुकता है किसीकी तरफ 
और गैरसा बन जाता है खुद के लिए ,
दिल तो हमारा होता है पर 
किसीका हो जानेके लिए हमारी इजाजत नहीं लेता .....
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बेखुदीकी वो इन्तेहाँ हो गयी ,
उनके इंतजारमें एक और शाम हो गयी ,
वो आकर बैठे है मेरे बाजुमें ,
उनके खयालोकी गली न छोड़ पानेकी गुस्ताखी हो गयी ....
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उनके चेहरेसे नज़र नहीं हटती हमारी ,
और वो है की पलकें झुकाए बैठे है ....
उठा दोगे पलकोंकी चिलमन हौलेसे ,
तो प्यारकी  कसम उस नज़रमें हम डूब जायेंगे !!!!
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हसीनोके सितम भी हसीं होते है ,
वार होते है नज़रोके और दिल इश्कमें घायल होते है .....

6 फरवरी 2012

नाम आते ही याद

आज भी उसका नाम आते ही याद 
मेरा चेहरा शरारतसे खिल जाता है ...
आज भी अक्सर रातोमे मेरा ख्वाब 
उसे मेरे पास लेकर आता है ...
कहता बहुत कुछ है मुझसे 
मेरे सुनने में कुछ न आता है ....
बस वो आँखें जिसकी गहराईमें 
एक समुन्दर भी ठहर जाता है ....
मेरा मन उसके दिलके मोतीको 
एक टूक देखते हुए पढ़ते जाता है .....

5 फरवरी 2012

....एक छोटा सा सपना

आज वक्तको पंख बांधकर उड़ाना है जल्दी जल्दी ... बस इंतज़ार है की वो वक्त वो घडी मेरे सामने आ जाए अभी अभी ...पर वक्त की अपनी रफ़्तार है ...जो अभी मुझे जरुरतसे ज्यादा धीमी लग रही है .....
एक लम्बे अरसे के बाद मैं मेरी जन्मभूमि पर जा रही हूँ ...सिर्फ दो घंटेभर का रास्ता है पर ये दूरी तय करने में मुझे शायद तेईस साल लग गए ...एक्का दुक्का जाना हुआ पर उसकी गलियोंमें घुमने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाया ...उसे नजदीकसे देखने का महसूस करने का वक्त नहीं था ...पर इस वक्त मुझे वक्त छिनना है ...वक्तके हाथो से ....मुझे मेरी जन्मभूमि को बदला हुआ देखना है ....
उस मिटटी पर मेरी पहली सांस थी जहाँ पर एक कुत्ते पर सस्सा चढ़ आया था और बादशाहने शहर बसाया था ...हाँ अहमदाबाद .....बहुत जल्द चार पुरे दिनका वक्त बटोर कर सिर्फ घुमने के लिए ..एक बंजारे की तरह घुमने के लिए ...कंधे पर जोला लटकाकर , उसकी बसोंमें घूमते हुए शहर को देखने ....
बहुत सी यादें है वहां की मेरे जहनमें ...पर मैं और मेरी दोस्त ....गर वो मशरूफ रही तो अकेले ही ....
बस ...मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते है ..एक छोटा सा सपना सच हो जाए तो !!!!!

4 फरवरी 2012

इन आँखोंमें बैठकर ...

लहलहाते है सपनोके खेत इन आँखोंमें बैठकर 
तेरे आने की आहटसे उनमे बहार जो आती है ...
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ज़ख्मोको सिलनेके लिए आंसूओके धागे है ,
इश्कके अंजामको सहने रातको नींद भी आँखोंसे भागे है !!!
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ग़मोंको घोलकर छलक जाते है ये आँखोंके पयमाने
तभी बहते अश्क भी  नमकीन बन जाते है ....
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रातभर जागा करती है  ये सड़के भी मेरे साथ 
चाँद भी मेरे जख्मो पर मरहम लगाने आता है  ....
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नयी दुनियाको बसा लेने पर ये दिल दुआएं ही क्यों दे रहा ?
क्योंकि खुदके प्यार को हम कभी बददुआ कैसे दे सकते है?
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हरदम चलते रहे मेरे साथ ये हवाओंके चौबंद 
आज क्यों बिखरी बिखरी बह रही ये टुकड़ोंमें चंद????

3 फरवरी 2012

एक पल एक बूंद एक उम्मीद ........

उम्मीदोंके दायरे बहुत बड़े होते है ,
एक मुठ्ठी उसे कब तक समां पायेगी ???
टिप टिप करते हुए कभी 
उम्मीद एक बूंद बनकर हथेलीसे टपक जायेगी !!!
खाली मुठ्ठी होती है कहाँ कभी 
ढेर सारे सपने भरे रहते है उसमे ...
एक सपना बर्फसा जमकर चिपक जाता है ,
और पिघलता है कभी हथेलीकी तपिशमें 
तो फिर बूंद बूंद बन पिघल जाता है ....
वो उम्मीद और वो बूंद 
जो शायद हयात होती है एक पलके लिए ,
फिर भी उसके सहारे जीवन सारा 
एक एक पल करके गुजरता रहता है ,
एक पल एक बूंद एक उम्मीद ........

2 फरवरी 2012

आयनेके सामने तो नहीं खड़ी ?????

एक दिन तन्हाई भीड़में चलने निकली ,
हर तरफ विचारोंके काफिले चल रहे थे ....
कोई अकेला उसकी तरह था ,
तो कोई दुसरेसे जुड़कर चला था ,
कोई किसीका हाथ थामकर चल पड़े ,
तो कोई अकेले अकेले आमके पेड़ तले खड़ा था ...
कोई चिड़ियाकी चहकसे महक रहा था ,
कोई गुमसुम बरबस बेबस खड़ा था ...
किसीकी  आँखमें ख़ुशी छलक रही थी ,
कोई अश्क छुपानेकी कोशिशमें लगा था ....
इस भीड़में भी हर कोई किसीकी तलाशमें था ,
हर कोई किसीके साथ होते हुए भी साथ न था ....
और कोई कोई अकेला होते हुए भी किसीके साथ था ....
तन्हाई मुसकरा दी चुपके से ,
लगा उसे एक पल के लिए वो आयनेके सामने तो नहीं खड़ी ?????

1 फरवरी 2012

मेरा ही तो चैन था ......

आज मनके समंदरमें सपनोकी सीपियाँ चुनी ,
कुछ खाली खाली सी निकली ,
कुछ में मोती मिले ,
कुछ सीपीमें हवाएं कैद थी ,
और कुछ सीपी सपनोको कैद करके बैठी थी ....
उन्हें नदीके किनारे छोड़कर वापस आ गयी ,
ये सीपी जो सजावट और शृंगार है 
एक नदी का एक समुन्दरका 
वो उनके बिना अधूरे से ,
जिसकी नियामत थी 
उसे सौपने का सुकून भी मेरा ही तो चैन था ......

31 जनवरी 2012

मुझे पुकार रही है ,

आज फिर एक बार जिंदगी मुझे पुकार रही है ,
और मेरे पास वक्त नहीं उसकी तरफ देखने का ,
क्या है कभी जिंदगी बोर होती है 
तो वो मुझे बुलाती है ,
और जब मैं बोर होती हूँ तो ...
तो ...
तो ...
मैं कुछ धमाल करना शुरू कर देती हूँ ...

30 जनवरी 2012

एक बहाना है

वो खुश रहने का एक बहाना है ,
की तेरे बिन भी जीना मुझे आता है ,
मुझे अपने अश्ककी कीमत पता है ,
इस लिए मैंने उसे बाहर आने पर पाबन्दी लगायी है ....
जिसे याद करते है हर पल ,
क्यों उसे जताने की जरुरत होती है ???
कोई भुलाने की कोशिश कर रहा हो मुझे 
तब उसे मेरी याद दिलानेकी क्यों जरूरत है ????
कुछ शिद्दतकी कमी होगी ,
कोई मुझे आधी राहमें छोड़ चला जाता है !!!!
बस एक ही गीला है ....
मेरे साथ गुजरे हर लम्हों पर मेरा बस नहीं रहा ,
वर्ना कहती उनको भी ,
मेरे पास ही रहो नहीं तो उसकी ख़ुशीमें तुम रूकावट बन जाओगे !!!!!