27 जनवरी 2016

हेलो ....... !!!

आसमानोंमें जम रही थी हवाएँ ,
बर्फ बनकर गिर रही थी रुई सी  ....
वो अंगीठी की तपिश से खुद को
गर्म करने की नाकाम कोशिशें
बदनमें सिरहन बनकर उमड़ रही थी  ....
आसमान चुप था  ,
जुगनू बैठ गए थे छुपकर  ,
रातका वो मध्धम संगीत भी सो रहा था  ,
चाँद खोज रहा था बादलों का दुशाला  ,
सितारों को ये ख़ामोशी अच्छी लग रही होगी शायद
इसी लिए वो सारे वैसे ही टीम टीमा रहे थे  ...
ऐसे में मेरे फोन का बजना
और धीरी आवाज से वो तुम्हारा कहना
हेलो  ....... !!!

6 जनवरी 2016

परायी अमानत

बेटी तू तो परायी अमानत है  ,
तू जहाँ ब्याह कर जायेगी वो ही तेरा घर  .. 
माँ बापू से ये सुना हरदम  ... 
माँ तूने जन्म दिया और बापू ने पढ़ाया  ,
क्या ये मेरा घर नहीं है ????
ब्याह करके बिदाई के वक्त :
माँ बोली ये तेरा नैहर है बिटिया अब से 
अब तू अपने घर जा रही है  ..... 
सास कहे अब परायी जनी  
क्या जाने इस घर के रस्मो रिवाज सब ???
मारन ताडन से दम घुंटता है 
तो क्यों नहीं जाती अपने घर वापस ???
मेरा घर कौनसा ???
मैंने एक नौकरी ढूंढी है  .... 
अब अपनी कमाई से मैं एक घर बनाऊँगी  ... 
वो मेरा घर होगा जहाँ कोई मुझे नहीं कहेगा :
चली जा अपने घर  ... 
तू तो परायी अमानत है  ,ये घर भैया का है  ..... 

17 दिसंबर 2015

रुखसत

वो बदगुमां नहीं ,वो बे हया  नहीं ,
पर बेरहम हो सकते है  ....
प्यार से उनका न रहा हो  इत्तेफ़ाक़
ये मुमकिन हो सकता है  ....
पर वो किसीका प्यार बने वो मुमकिन है   ....
चाँद और तारे रातों में नज़र आते है  ,
गौर फरमाइए जरा , तवज्जो भी दें  .....
चाँद और तारे रातों में नज़र आते है अक्सर   ...
पर इस चाँद के दीदार से मेरे हर दिन का आगाज़ होता है  ....
वो कहते है तुम्हारी किस्मत की लकीरों में हम नहीं  ,
उन्हें क्या पता  ...की उन्हें क्या पता है  ???
हमारे पास तो हथेली ही नहीं  .....
क्या कहूँ बस आवाज को बनाकर अपना संदेसा  ,
मैंने महफ़िल में गाई  एक नज़्म  ,
उन्होंने मुझे देखा भी कनखियोंसे  ,
बस हाथ पर दुशाला ओढ़े कसीदे जो मैंने पढ़े  ,
लब्ज़ोंने किस्मत लिख दी थी मेरी
जो न हाथोंमे  थी न लकीरों में  .....
तेरी यादों से वाबस्ता कभी तनहा न हुए हम   ....
तेरी डोली को भी रुखसत करने आये थे हम  .... 

7 दिसंबर 2015

इतिहास

खुद की तस्वीर देखकर हैरान हूँ  ,
ये ज़ुर्रियाँ  कब लिखने लगी दास्तानें
चहेरे के कागज़ पर बिना इजाजत के ??
मुझे पूछा तो होता चहेरा जो मेरा है तो !!!
ज़ुर्रियोँ में बैठा वक्त मुस्कुरा रहा था
कह रहा था मैं वर्तमान हूँ  ,
तुम किस गलीमें जवानी की गुमशुदा हो ???
तो खिड़की खोली मैंने अपने कमरे की  :
देखा :
वो घर सारे नया कलेवर लिए खड़े है  ,
वो दो मंज़िला ईमारतें आसमाँ से गुफ्तगू में व्यस्त ??!!
रास्ते थोड़े वजनदार हो गए है तो चौड़ी जगह उन्हें भी चाहिए !!
अब ये छोटी सी जगह लोग शहर के नामसे जानते है  ,
रेलवे स्टेशन पर भी नाम के साथ जंक्शन जुड़ा है  ..
तब ऊपर से हवाई जहाज गुजरा  .....
आसमान पर हमारे साथ दौड़ने पर निशान फिर नजर आये  ,
क्या ये वर्तमान है ???
वो हमारी जवानीने पैदा किया है  ,
इस की परवरिश में हम बूढ़े हो गए ????
बस जुर्रियों ने हंस दिया हम पर  ...
कहा :
कुछ नहीं नया ये ,इतिहास खुद को दोहरा रहा है  .. 

18 नवंबर 2015

औरत : तेरी कहानी (9)

घर लौटे तो लड़के ने ही बोला की मैंने इसे एक सप्ताह का समय दिया है सोचने के लिए  . और उसके बाद ही जवाब देना  . माँ के चहेरे पर चिंता की लकीरें थी  . लड़का मुझसे काफी बड़ा था  . और एक पत्नी बनने के बाद घर की जिम्मेदारीके साथ कॅरियर में ऊंचाई को छूना मुश्किल तो बन ही जाता है  . मुझे दीदी के कर्म की सजा मिलनी थी  . और लड़की के जन्म की सजा भी भुगतनी थी ये शादी करने के बाद  . मैं जानती थी की शुरुआत में तो सब अच्छे से ही पेश आते है पर मेरे शौक के कारण  घर पर देरी से लौटना  , पुरुषों के साथ व्यावसायिक संपर्क में रहना एक पुरुष के इगो को बहुत समय तक रास नहीं आ सकता  . फिर खानदान की इज्जत को बीच में लाया जाता है  ,और संतान को जन्म तो औरत के जन्म को पूर्ण करने के लिए देना ही पड़ता है  .
सोच विचार में आज छः दिन तो चले गए  . कल जवाब देना था और पापा तो हाँ ही बोलने वाले थे  .
शाम को कॉलेज से लौटते वक्त मेरा एक्सिडंट हो गया  एक ट्रक से टकराई  . मेरे दांये पैर में चोट आई और मुझे हॉस्पिटल में दाखिल कराना  पड़ा  . मैंने भगवान का शुक्रिया किया की बात टली  . पापा ने उस लड़के को फोन करके हकीकत बताई  . एक सप्ताह के बाद जब मैं लौटी तो मुझे पूर्ण तरीके से ठीक होने के लिए लकड़ी के सहारे एक साल तक चलने की हिदायत दी गयी थी  . मैं बेहद खुश हुई  . इस के अलावा दूसरी कोई प्रॉब्लम नहीं थी  . मेरी माँ ने इस दौरान पापा को समजाया  की आपके इस फैसले के कारण  मेरी ऐसी हालत हो गयी  . पापा का रुख थोड़ा नर्म हुआ  . दादी ने तो उस लड़के के कदम को ही गलत ठहराया  … बदशगुनी करार दिया  .
एक हफ्ते बाद वो रियालिटी शो की शुरुआत होनी थी  .
रात मैंने पापा से कहा : पापा , मैंने संगीत की इतनी आराधना की है  और वो शो एक हफ्ते में शुरू होना है  . एक साल तक तो शादी होने से रही  . तो फिर मुझे जाने दो न !!! वहां तो स्पर्धकों का पूरा ख्याल रखा जाता है  . अच्छे होटल्स में ठहराया जाता है  . मुझे जाने की इजाजत दोगे  तो मैं ताउम्र आपकी शुक्रगुजार रहूंगी  .
पापा कुछ नहीं बोले  . उठकर अपने कमरे में चले गए  .




9 नवंबर 2015

दिवाली …

कुछ कहती है दिवाली
कुछ सुनती है दिवाली
अंधेरो के घेरे में पनपती है दिवाली  .
रौशनी का मोहताज नहीं कोई ,
खुद के अंदर के दीपक को उजागर करो ,
तो रौशनी से जगमगाती है अस्तित्व को  …
चाँद भी अदब करता है उस उजालों का  ,
तब तो सितारों की संगत में
पनपती है दिवाली   …
किसीके दिए में आँसू का तेल न हो
उस आँखों को ढूंढ कर देखो रौशनी में  ,
एक हास्य का लास्य भर दो उस चहेरे पर
वो ही सिखाने के लिए आती है दिवाली   …
रौशनी का मतलब सीखो दिये से  ,
खुद को जलना पड़ता है
अंधेरों से लड़ना पड़ता है  ,
उम्र दिए की भले ही हो एक रात की  ,
उस दिन को   हर साल मनाना होता है   ....
रंगोली के रंग से रंग चुराकर मिठास को
अपने हृदयमें बसाकर   ,
पटाखों की चमक और आवाज से
पुरे साल के इंतज़ार के बाद आती है दिवाली   ....
हर  इंसानों के लिए शुभकामना का प्रतीक
बन इंसानियत को जगाती है दिवाली  .... 

4 नवंबर 2015

नीले आसमानों पर

ख्वाबों के नीले आसमानों पर
हसरतें लिख रही है कुछ दास्ताँ अनकही सी  .
रातों को नींद बैरी बनकर ठिठोली करती ,
मेरे कमरे से दीखते चाँद को दिखाकर
चिढ़ाती  है मुझे अक्सर  ....
चाँद देखकर मुझे हौले  मुस्कुराया ,
मैंने भी उसके इस्तकबाल  के लिए
 एक नज़्म को धीरे से गुनगुनाया   …
मेरी और चाँद  गुफ्तगू बस चल रही थी
और पीछे से  हसरतने आवाज लगायी
वो  नूरानी हयात बनकर सामने खड़ी थी  …
मैं और चाँद दोनों बूत बने देखते रहे
और सुबह हो गयी  .... 

31 अक्तूबर 2015

औरत : तेरी कहानी (8 )

मेरा ये कॉलेज का आखरी साल था  . मैंने संगीत महाविद्यालय से भी गायन विभाग में स्नातक की पदवी ले ली थी  . छोटे मोटे इवेंट में मुझे बतौर कलाकार बुलाया जाता था  . इस दौरान मेरे कॉलेज में एक बहुत ही बड़े रिआलिटी  शो में हिस्सा लेने के लिए इवेंट हुआ  . और मेरा सिलेक्शन तय होने की खबर मुझे आज ही मिली थी  . दीदी के कारण  मैं कुछ भी नहीं बोली  . पापा दूसरी सुबह उठे और आँगनमे एक ठन्डे पानी की पूरी बाल्दी  खुद पर उंडेल ली।  जोर से बोले मेरी बेटी आज से मेरे लिए मर गयी है और इस घर के लिए भी  .... मेरे केवल एक ही बेटी है  . अगर कोई बड़ी से रिश्ता रखेगा तो उसे भी इस घर से बहार जाना पड़ेगा  .
घर के माहौल में भूचाल आ गया  . सिर्फ दादी को छोड़ सब हक्के बक्के रह गए थे  … दीदी ने कोई गुनाह नहीं किया था की उन्हें इस तरह सजा दी जाय  .
मेरे सिलेक्शन की खबर मेरी जुबान तक आ ही नहीं सकी  न मैंने माँ से भी बात की  . ये वक्त ऐसी बात के लिए अनुकूल नहीं था  .  दो दिन बाद वो रिआलिटी  शो का एक नुमाइन्दा मेरे घर पर आया  . पापा उस वक्त घर पर ही थे और मैं कॉलेज जा चुकी थी  . पापा ने उसके आने का प्रयोजन पूछा  . सारी बात जानी और ऑफिस चले गए  .  मुझे माँ ने तो बताया पर पापा की कोई प्रतिक्रिया नहीं थी  .
आज शनिवार था  . पापा ने मुझे कॉलेज से जल्दी घर आने को कहा  . मैंने चुप चाप हामी भरी और चली गयी  . पापा ने माँ से कहा की मुझे शाम लड़के वाले देखने आने वाले है  . और मुझे शाम को सब देखने भी आये  . पापा ने उन्हें दीदी के बारे में इत्तिला दी और ये भी कहा की उससे मेरा कोई वास्ता नहीं  . लड़के ने कहा मैं एक बार आपकी बेटी से बात करना चाहता हूँ और वो भी घर से बहार कहीं जाकर  .
पापा मना नहीं कर सके  . उस लड़के के साथ मैं पास के बगीचे में गयी  .
लड़का बोला : देखो ,मुझे तुम्हारी दीदी से कोई लेना देना नहीं पर तुमसे जरूर है  . मुझे ऐसा लग रहा है की दीदी की वजह से तुम्हारी शादी जल्दबाजी में की जा रही है  ज़ो गलत भी है  . मैंने तुम्हे टी वी पर देखा है कई बार  . इस लिए मैं तुम्हे ये पूछना चाहूंगा की क्या तुम आपने शौकको मार देना चाहती हो ??? तुम्हे अपने एक अच्छे कॅरियर की बलि देनी है शादी करके  ???
मैंने कहा : मेरे लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा  . पर मैं दीदी के लिए खुश हूँ  . लाखो में एक भारतीय को ऐसा मौका मिलता है  तो उसके लिए ये बलिदान जाया नहीं जाएगा  . वक्त पिताजी  को अपनी गलती मैंने पर और दीदी को माफ़ करने पर मजबूर कर देगा  .
पापा और दादी को एक बेटे की इच्छा थी  . अब मैंने भी खिलाफत कर दी तो बेटी के जन्म के लिए गलत संदेश जायेगा  . और ऐसा भी हो की ये समाज बेटी को पनपने का मौका ही न दे  !!!
लड़के ने कहा : देखो मैं ये शादी के लिए तभी राजी होऊंगा जब तुम अपना कॅरियर शादीके बाद भी नहीं छोड़ोगी !!! मैं नए ज़माने का लड़का हूँ और मेरी भी जिम्मेदारी है की मेरी होने वाली पत्नी की ख्वाहिशें मेरी भी इच्छा बने  !!!! बस मेरी उम्र तुमसे कुछ ज्यादा है  . तुम्हारे पिताजी ने नहीं बताया होगा की मैं तुम से दस साल बड़ा हूँ  . तुम सोच विचार कर जवाब देना !!!!
और हम वापस लौटे  … 

30 अक्तूबर 2015

औरत : तेरी कहानी (7 )

पापा आज थोड़े देर से घर लौटे थे रात करीब साढ़े दस बजे  . माँ उन्हें कुछ कहे उससे पहले तो दादी का आलाप और रोना धोना शुरू हो चूका  . अब तक तो माँ ने इतने स्वस्ति वचन दादी की जुबानी सुन लिए थे की शायद इस जिंदगी का क्वॉटा खत्म हो जाए  . उस दिन दीदी बोलकर गयी थी की उसकी एक्स्ट्रा क्लास है तो वो बाजु वाली शेफाली और उसके भाई के साथ ही लौटेगी  . सच में एक्स्ट्रा क्लास तो थी और लगभग पौने दस बजे शेफाली और उसके भाई के लौटने के  बाद हंगामा शुरू हो गया  . वो लोग सीधे शेफाली के घर गए  . शेफाली से पता चला की दीदी आज कॉलेज नहीं आई थी  .  बस फिर तो क्या था  सारे  पटाखे आज ही फूटे  .
माँ भगवान के सामने रोये जा रही थी पर उसकी प्रार्थना थी की : जल्दी साढ़े ग्यारह बजे और दीदी की फ्लाइट टेक ऑफ़ हो जाए  . पापा पुलिस में जाने के खिलाफ थे और दादी भी  . मैं तो बस दीदी के बारे में सोच रही थी  . लगभग रात के बारह बजे फोन की घंटी बजी  . दिल्ही वाली बुआ थी  . पापा ने फोन उठाया  . उन्होंने कहा : वीरजी , शायद आप श्रद्धा (दीदी ) को लेकर परेशान होंगे  . पर अभी साढ़े ग्यारह बजे की फ्लाइट से वो अमेरिका जाने के लिए रवाना  हो चुकी  है  . भाई शायद तुम अभी अपने आप को सबसे ज्यादा कोस रहे होंगे पर याद रखना की इसी लड़की के लिए सिर्फ तुम नहीं ये देश भी फख्र करेगा  . तुम अपने हीरे को नहीं पहचान पाये पर मैंने उसका मोल जाना है  . शायद अगर तुम मुझसे अब कोई रिश्ता न रखो तो भी मुझे कुबूल होगा  . और फोन रख दिया गया  .
पापा फटी आँखों से सामने वाली दीवार को तक रहे थे  . मैं अपने कमरे में सोने चली गयी  . मैं इस बात से बेखबर थी की अब इस बात का असर मेरी जिंदगी पर कैसे होने वाला था ????!!!

27 अक्तूबर 2015

औरत :तेरी कहानी (6 )

माँ बोली : सब कुछ तो जानती हूँ मैं की ये गलत हो रहा है पर मेरी सुनता कौन है ??मेरी इस होनहार बेटीके लिए मुझे बहुत चिंता है  . पर अब बेटी फैसला तुम्हे लेना है  ज़ब तक तू हमारा मुंह ताकेगी तब तक यहाँ से तुम्हे कोई मदद नहीं मिलेगी  . मैं तो इतना जानू की तुम्हे तुम्हारी मदद खुद करनी है  . तुम्हारी शादीके लड्डू खाने के बाद लोगो को तुम्हारी जिंदगीमे कोई दिलचस्पी नहीं होगी  . कुछ अच्छा हुआ तो ठीक है और नहीं अच्छा हुआ तो जबरन आकर हमारे घाव कुरेदकर अफ़सोस जताने चल पड़ती है दुनिया  .
आज और अभी तू फैसला कर  . इधर कुआँ है और उधर खाई  . तुम्हे या तो घर मिल सकता है या तुम्हारी मंज़िल।  अगर घर चुनती हो तो तुम्हे तुम्हारी मंज़िल को भूलना पड़ेगा और ये गलत होगा  . तुम्हारे लिए और हर बेटी के लिए  … और अगर तुम मंज़िल चुनती हो तो मुझे कहना होगा की हर इंसान का जो सपना हो सकता है ऐसे देश की धरती पर तुम जो पढ़ने जाओगी वो हर बच्चे के लिए मुमकिन नहीं  . सिर्फ और सिर्फ अपनी होशियारी के बलबूते पर तुमने वजीफा पाया है  . तुम्हे हमारे पर निर्भर होने की कोई आवश्यकता भी नहीं है  और सबसे ज्यादा तुम वो शिक्षा पाना चाहती हो  . मैं कहूँगी हम सबको भूल जा और जा बेटा तुम्हारी नयी मंज़िल तुम्हारी राह देख रही है  । तू हमारी चिंता मत कर  . हमारी दुआएँ तुम्हारे साथ ही है और रहेगी  .
दीदी : पर ये छोटी का भविष्य ???
माँ : अगर तू सफल हुई तो उसके भविष्य पर कोई चिंता नहीं  पर हर लड़की अपनी किस्मत लेकर ही आती है  . बेटी तेरी सफलता यहाँ हजारों लड़कियों के जीवनमे उम्मीद के दिए जलायेगी  . इस लिए तू कुछ मत सोच बस जा  . और बुआ जी को दिल्ही के बस अड्डे पर छोड़ने के बहाने तू भी निकल जा  क़ोइ सामान मत लेना  . बुआ सारा इंतज़ाम कर देगी  …
बुआ और मेरे लिए माँ का ये रूप नया था  . दूसरे दिन सुबह बुआ तैयार हुई और उन्होंने तब जाने को बोला जब पापा उन्हें छोड़ने नहीं जा सकते थे और दीदी के कॉलेज का वक्त था  . इस लिए दादी ने दीदी से बस अड्डे जाने को बोला  . हम अपने भीतरी एहसास को दबाकर सिर्फ बुआ को हाथ हिलाकर बिदाई दे रहे थे  . आंसू को रोक लिया  .  और दीदी को जाते हुए देख रहे थे  .......
शाम को दीदी घर नहीं लौटी तो शुरू हुआ तूफान। ।