24 जुलाई 2016

शायद..

शायद आज नई बात हो
 शायद आज फिर उनसे मुलाकात हो
शायद उन्हें भी याद आए मेरी वह बातें
शायद बे खयाली में उनके लबों पर मुस्कुराहट हो शायद आज वह बात हो
शायद मुद्दतों के बाद यह फुर्सत के लम्हे मैंने पाए हैं शायद उन्हें जीने की ख्वाहिशों वाले उम्मीदें हो शायद वह आए फिर भी मैं चुप रह जाऊ
शायद आज उनकी तरफ से कोई बात हो
शायद जिसकी बदौलत जिंदा रह पाए हैं हम
शायद वह मिले या ना मिले
 और
 मेरे हाथों में मेरे सपनों के टूटे हुए शीशे के टुकड़ों में चाहत के अफसाने हो.....

18 जुलाई 2016

चुभन

नश्तरो की चुभन
तेरा नाम याद दिलाती है
वह दिन में उठती टीस
तेरे नाम से मुझे तेरा पता बताती है अलग से जहां में चले जाते हैं
हर और
यादों के कब्रस्तान नजर आते हैं
घूमते है यहां अब डर नहीं लगता
यादें गूंगी होती है
आवाज नहीं दे पाएगी हमें
पर नंगे पैर घायल होते हैं कांटो से
काटा बनकर वह दर्द दे जाती है
दर्द ही जब दवा बन जाए तो
डर कहां लगता है??
जब मेरी याद करने की आदत गई नहीं तेरी चुभने की आदत गई नहीं
सोचते थे तेरे जाने से मर जाएंगे हम भी पर क्या करें
यह जीने की आदत गई नही…..

2 जुलाई 2016

वादा है मेरा.

कभी तनहा रहने का बहाना ढूंढते थे ,
तेरी यादों के सफे पर लिखे
हर गुजरे लम्हों को जीने के लिये…..
अब तन्हाई से डर लगता है,
फिर से तेरी बेवफाई
सबब न बन जाए मेरी रूसवाई का …..
न तेरा गम है न तेरी जूत्सजु,
तु सलामत रहे तेरे ख्वाबो के साथ ,
मेरी वो पाक यादों पर
तेरा साया भी ना पडे …..
गर कभी सामना हुआ
जिन्दगी की राह पर चलते चलते,
पहचान से भी मुकर जाने का
वादा है मेरा ...।।
बसर जायेगी ये जिन्दगी तनहा भी ,
तेरी यादों की धून्ध मे
मेरा नाम तक तुझे याद न रहे…..

29 जून 2016

ये बारिश !!!!!

तस्वीरो की बात







22 जून 2016

वादा

आज कल थोड़ा सा आलसी बनकर सूरज ,
बादलों में लिपट कर बैठा रहता है ,
वो हवाओं के तो पर निकलकर आये है ,
उड़ती फिरती रहती है यहाँ से वहां ....
बूंदों को छुपाए बादलों को कंधे पर बिठाकर  ,
इंतज़ार कर रही है धरती पर रुख करने का  ....
बादल और सूरज छुपनछुपाई खेलते है  ,
तब हवाएं थम जाती है  ,
 चेहरे पर पसीने की बुँदे जम जाती है  ...
नखरे मत दिखा अब तो  ,
चल आ जा बारिश अब के शाम को  ...
मिलने का वादा चाहिए तुमसे  .... 

4 जून 2016

मौसम

तन्हाई के जंगलों मे यादों के दरख्त पनपते है.
यहाँ पर भी मौसम होती है
औऱ मौसम के मिजाज भी बदलते हुए.
यहाँ भी पतझड और बहारो के काफिले,
यहाँ भी खुद से बिछडे औऱ खुद से जुड़े......

27 मई 2016

कभी खुद से

कभी खुद से नजर मिलाने की खता हो गई,
लगता है अब एक अजनबी से मुलाकात हो गई.
मैं देखती रही अक्स को अपने पुकार कर
नाम मेरा ही था फिर भी आवाज नई लगी.
अन्जान शहर की गली पहचानी सी लगती है,
अपनों की ही भीड़ है जिसमें मैं बेगानी लगने लगी.

17 मई 2016

फर्क

जलती हुई चाहत दिल में सुलग  रही थी ,
न जाने कहीं से शबनम की बून्द टपकी ,
झख्म पर हुई जलन कराह निकली यूँ ,
वो बून्द आंसू की थी नमक मिली ....
 कौन किसी से मिला है चाहकर कभी  ,
बस हमराही थी की साथ चलते चलते
पहचान हुई और लगा की जानते है हम
एकदूसरे को पिछले जन्म से  ....
क्या देखा की तुम अच्छे लगने लगे सबसे ,
क्या महसूस किया  बुरा तो कोई नहीं ,
मैं भी वही हूँ , हो तुम भी वही ,
फर्क शायद नजर नहीं नजरिये का होगा  ....!!!!

14 मई 2016

नब्ज़ में लहू

नब्ज़ में लहू नहीं लावा दौड़ता होगा शायद ,
दिलमे जब एक गूंज उठती थी तेरे नाम की ,
झुलसती हुई रातें बेमतलब यूँ ही गुजरती  ,
जब तेरा जिक्र मेरे सपनों  महफिलमें   होता...
बेतरतीब से बिखरे मेरे कागज़ यूँ ज्यों त्यों ,
लब्ज़ उभरते तेरे नाम को बयां करने और बिखर जाते  ....
वो आह थी , वो राह थी , वो चाह  थी यूँ ही सजी ,
मेरे ख्यालों के रेगिस्तानों में आज
जिसे आज भी तेरी ज़लक का इंतज़ार है शायद  ....
नज़्म बनते हुए मेरे आंसू के वो कतरे ,
दर्द को दिल से बहाकर   ले चले कफ़न ओढ़ाकर ,
फिर भी साँसे थिरकती है बेजानसी  जिस्म में  ..... 

18 मार्च 2016

कुछ गुजरी यादें ,

कुछ बीते दिन ,
कुछ गुजरी  यादें ,
कुछ टीस  कुछ हंसी  ,
सब बेमानी से लगते है ,
 ये जिंदगी रोज
 एक नया पन्ना खोलकर बैठती है ,
रोज ये चाहत होती है उसे कोरा छोड़ने की  ,
मैं मुंह फेर के बैठती हूँ  ,
दूसरे दिन वहां मेरी उदासी लिखी होती है  ...
ये वक्त अपनी कहानी लिखने आता है  ,
ये किस्मत उसे चलाती  होगी  ,
जिंदगी तो मेरी होती है  फिर भी  ,
वहां मेले लगते है जो मेरे होते हुए भी
कभी कभी अजनबी लगते है  ...
अफ़सोस या ख़ुशी के परे  एक जहाँ होता है  ,
मेरा मक़ाम अब शायद वहां होता है  .....