1 नवंबर 2011

साथ साथ ......

चलते चलते यूँही कोई अजनबी मिल गया ,
बस जाना पहचाना एहसास दिलमें आकर रुक गया ....
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हाले दिल बयां न हो पाए ,
लब्ज़ रुक जाए सिलवटोंमें कहीं 
आँखोंसे हर अनकही बयां हो जाए ,
वो सुन ले और हयासे ये पलकें झुकती जाए ....
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एहसासकी हरकतसे होती  रहे धड़कन बोजिलसी यूँ ,
रातकी गहरी ख़ामोशीमें  कुछ और गहराती रातें ये 
बस आवाज़ गूंज रही है फिजाओमें 
एक नाम तुम्हारा है एक नाम मेरा भी है साथ साथ ......

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