29 सितंबर 2011

बस एक पल अपने लिए ...

बस एक पल अपने लिए ....
जिंदगीसे चुराना मेरे लिए मुश्किल जरुर हो जाता है कभी कभार पर नामुमकिन कुछ भी नहीं ...और खुद पर और परमशक्ति पर श्रध्दा हो तो कुछ भी हो सकता है ..कल इस बात की अनुभूति भी हो गयी ....
पिछले दस सालसे नवरात्रीके दिनोंमें गायत्री माँ के अनुष्ठान और सुबहमें बहुचराजी देवी के दर्शन करने जाना मेरा अटूट नियम था ...पर इस साल मेरी तबियत कुछ ज्यादा ही नासाज़ रहने लगी ....मैं कुछ भी नहीं कर पायी इसी ख्यालसे मुझे बेवजह रोना आ गया ....
पिछले साल तो मंदिर तक पैदल जाकर आने का संकल्प लिया था और पूरा भी किया था ...पर काफी कमजोरी के कारण इस साल मेरी हिम्मत ही नहीं हुई ...पुरे दिन सोचने के बाद ...शक्ति की तस्वीर के आगे बस इतना ही कहा : माँ मैंने क्या गुनाह किया ?? क्यों तू मुझे नहीं बुलाती ???
शाम को बस तैयार होकर पैदल निकल गयी ...पति देव को फोन किया आप उधर रहे ताकि मैं आपके साथ लौट सकू ....मेरे पडोसी ने मुझे टोका भी : अरे आज तो आप नयी साडी पहनकर जा रहे हो ???
तो मैंने कहा : देखो बहनजी ,हम किसी फंक्शन पर जाते है तो पार्टी के लिए तैयार होते है और ये तो खुद माँ शक्ति का उत्सव है तो क्यों नहीं ??? और मैं गयी ,दर्शन करते हुए आँखोंमें आंसू थे ....
मेरे सहेली ने रात गरबा वक्त मुझे कहा : कल सुबह मेरे साथ आना स्कूटर पर चलेंगे .......
कहते है भगवान परीक्षा लेते है और रस्ते भी खुद ही दिखाते है ........
मैं गरबे तो नहीं खेलती पर सामने देखने जरुर जाती हु ...हमारे फ्लेट का एक छोटा सा बच्चा तक़रीबन एक सवा साल का ...निसर्ग ...बहुत ही चंचल ....कल कम्पाउंडमें उसके साथ खेलने का बहुत ही मजा आया ...मैं छुप जाती और वो मुझे ढूँढने आता ...सब औरतें गोसिप कर रही थी तब मुझे उसके साथ खेलने में मज़ा आ रहा था ....दोनों घर जाते वक्त तो दोस्त बन गए ....
कहते है बच्चे में भगवान होता है ...और भगवानको अपने हर बच्चे की चिंता भी होती है ....
बस एक चीज लगी की आप अपने आप को जब भी कभी भी बहुत मजबूर समजो एक बार ऊपरवाले को याद कर लेना हिम्मत अपने आप आ ही जाती है .....
जय माता दी ....

1 टिप्पणी:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...