19 सितंबर 2011

एक क़र्ज़ है ....

आंसू तो पलकों पर रखा एक क़र्ज़ है ,
मुस्कान तो होठोंका एक फ़र्ज़ है ...
पलकों पर सारे दर्दके नमकको खुदमें घोल 
ये अश्क नमकीन बन जाते है ....
दिलकी दीवारोंको तोड़कर हर ख़ुशी 
होठों पर मुस्कान बनकर जच जाती है ....
आंसू के बगैर अधूरीसी लगती है हर आँख 
होठोंकी सुन्दरता भी कभी पूरी है मुस्कानोंके सिवा ???
मुस्कान तो हर होठका शृंगार है ,
उससे बिखरती हुई हंसी तो एक चेहरे की जान है ....
अश्कके बगैरह लगती अधूरी हर आँख है ,
ये तो दिल के दर्पणको साफ़ करनेकी एक दवा है ....
मेरे होठोंकी मुस्कराहटकी वजह था कोई ,
हमें बेवफा समजकर पलकों पर अश्क दे गया कोई ......

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...