24 अगस्त 2011

उड़ान



एक परिंदेके पंख है ,


पंखको परवाज़ है ,


परवाज़ को एक उडान है ,


उडानके लिए एक आकाश है ,


अनंत , नज़रके भी उस पर तक ............


पर वहां तनहाई है ......


वहां कोई आश्रय नहीं है ...सिर्फ उडान ....


नीचे धरती है ,


घने पेड़की बाहें है ,


टहनीका आश्रय है ,


पत्तोंको मेरी कुहू का इंतज़ार है ????


वहां एक विश्राम है ........


क्या करूँ ????


बस आकाशमें उतना ऊँचे जाऊं


की


धरतीसे कभी दूर ना हो जाऊं .....

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