29 जनवरी 2009

ऋषिकेश



अब हम जा रहे है अपने इस भ्रमणके तीसरे पड़ाव की ओर ....


जैसे की आपसे मैंने पहले भी बताया था की मेरी सबसे पसंदीदा जगह है ऋषिकेश हरिद्वारसे तकरीबन २०-२५ किलोमीटर की दूरी पर है रेल का एक सिरा जाता है देहरादून की ओर पहाडोंमें और दूसरा ऋषिकेश की ओर ...लेकिन हरिद्वारमें हरकीपौडी के किनारे से लगे शटल रिक्षाएँ भी एक बेहतरीन जरिया है ऋषिकेश पहोंचनेकागंगा नदी का साथ कुछ पलों के लिए जरूर रहता है आगे चलकर आती है गंगा की मुख्य धारा जहाँ से उसका हरिद्वार की ओर रुख होता है इस जगह से समयानुसार उसकी गति को भी संतुलित करने की ओर कभी जरूरत पड़ने पर प्रवाह को साफ सफाई के लिए बंध करने की भी व्यवस्था है आगे चलकर मन्दिर एवं आश्रमों की कतारों को भी आप देख सकते हो आगे जाने पर बांयी ओर शान्तिकुञ्ज -माता गायत्री का धाम है यहाँ भक्त जन साधना करने आते है जिनके रुकने की सुचारू व्यवस्था है ...


अगर आप रिक्शा में सवार है तो दायें बांये देखने का सिलसिला जारी रखिये क्योकि यंही से शुरू हो रहा है पर्वताधिराज हिमालय का साम्राज्य बहुत ही हलके से वह अपने पंख पसारना शुरू करते है अगर पैकेज टूर में आए लोगोंसे आप पूछेंगे की ऋषिकेश में आप कन्हा गए ? तो ज्यादातर जवाब होंगे -लक्ष्मण जुला , रामज़ुला,गीता भवन .... पर यह सब जगह ऋषिकेश से थोड़ी सी दूरी पर है और उस जगह का एक खास नाम है "मुनि की रेती "॥


हम आ गए है ऋषिकेशमें अगर आप दौड़ती हुई शहरी जिन्दगी से थकान महसूस कर रहे हो तो यह जगह आराम का अच्छा पर्याय बन सकती है यहाँ यात्रिओं की धूम नहीं मचती , कुछ घंटे के लिए आते है और हरिद्वार या बदरीनाथ के लिए चल पड़ते है यहाँ हम माया कुण्ड नामक जगह पर एक हनुमानजी के मन्दिर में ठहरे थे एक छोटा सा कमरा मिलता है मन्दिर के नीति नियमों का पालन श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए सुबह और शाम भव्य आरती होती है मन को शान्ति देने वाली सुंदर जगह है यहाँ से पैदल सिर्फ़ पाँच मिनट की दूरी पर पतित पावनी गंगाजी की धारा है ...


एक पक्के बंधे हुए विशाल घाट पर सीढियाँ चढ़कर जब ऊपर आते है तो दर्शन होते है गंगामैया के ... यह जगह का नाम है त्रिवेणी घाट एक छोर पर है शिवजी की जटासे निकलती गंगा की मनोहर प्रतिमा और मध्य में है अर्जुन को गीता ज्ञान देते हुए श्री कृष्ण की मनोहारी विशाल मूर्तियाँ एक रथ में सवार और एक विशाल गंगा माता का मन्दिर घाट पर चलते हुए दुसरी और की सीढियाँ उतरते है तो आ जाती गंगानदी यहाँ आपको गंगा का प्राकृतिक रूप देखने को मिलेगा प्रवाह की गति तो तेज है ही लेकिन यहाँ ये आम नदियोंकी तरह ही बहती है उसके शीतल जल में पाँव रखते ही मन प्रसन्न हो जाता है यहाँ पर ऋतू अनुसार शाम सात से साढे सात के बीच गंगा माता की भव्य आरती होती है प्रवाह में दीप बहाए जाते है काफी भीड़ रहती है पर विशाल किनारे पर सब शान्ति से देख सकते है लगभग सात बड़े बड़े आरती के पित्तल के दिए से निकलती हुई परम ज्योत की तो आप कल्पना कर के देखिये ....


यहाँ से बांये हाथ पर ही पहाड़ों की शृंखला शुरू हो जाती है सुबह के वक्त भी साढ़े सात का वक्त आरती के लिए होता है यहाँ स्नान करने का महिमा और आनंद ही कुछ ओर है यहाँ का स्नान तेज प्रवाह और जंजीरों से जकडा हुआ नहीं है पास में ही साफ सुथरे बाथ रूमों मैं कपडे बदलने की व्यवस्था है शामके वक्त आरती में यहाँ कई विदेशी लोगों को भी शामिल होते हुए देखा जा सकता है ...


यहाँ मेरी मुलाक़ात दो विदेशी महिलाओं से हुई जो अमेरिकासे आई थी काफी कुछ बातें हुई वे भारत से काफी प्रभावित थी ऋषिकेश की एक देखने लायक जगह है भरत मन्दिर शांत ,सुंदर और सुरम्य है जो कोई राजा भरतकी याद में बांधा गया है वहां सब लिखा हुआ है एक ओर अय्यपा मन्दिर है जो बहुत सुंदर है पूरे ऋषिकेश में हमें कोफ़ी पिने ढूँढते हुए यहाँ तक आना पड़ा था अगर फुर्सत हो तो ऐसी जगह पर हमें तीन चार दिन ठहरना चाहिए यहाँ टहलते हुए सिर्फ़ चलकर ही घूमने का मज़ा ही कुछ और है हम यूँही टहलते हुए रेलवे स्टेशन के अन्दर तक घूमने निकल पड़ते थे एक अनजानी जगह पर जहाँ हमें कोई पहचानता न हो वन्हा बेफिक्र होकर घूमना एक अनोखा अनुभव है बाज़ार में सभी चीज वस्तुएं उपलब्ध हो जाती है हिमालय में बसे हुए विभिन्न स्थानों के लिए बस भी यंही से चलती है मॆं चाहूंगी की आप भी ऋषिकेश में कभी मेरी तरह गंगा नदी को सही मायने मॆं महसूस करें साफ गंगा[थोड़ी सी गंदगी हैं जो माफी के लायक है ],प्राकृतिक गंगा ,तेज गंगा , शीतल गंगा जहाँ हम हर सुबह और शाम तकरीबन दो दो घंटे उसे निहारते हुए बैठे रहते थे ....


तो अब अगली बार हम मिलेंगे मुनिकी रेती पर ....

11 टिप्‍पणियां:

  1. प्रीति आपकी पोस्ट पढ़कर लगा की शायद ऋषिकेश अब भी पहले जैसा ही है । हमें ऋषिकेश गए हुए कई साल हो गए है पर वहां की हरियाली और गंगा जी का प्रवाह आज भी मन मे बसा है ।

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  2. बहुत ही अच्छी और सुंदर जानकारी दी आपने ...लेख पढ़ कर लगा मानो सामने सजीव चित्र उभर आया हो ....


    अनिल कान्त
    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  3. बहुत सुंदर यात्रा वर्णन

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  4. रुड़की में था तब हरिद्वार और ॠषिकेष जाना होता था पर तब गंगा की पावन धारा के साथ ज्यादा वक़्त बिताना नहीं हो पाया जो कि ॠषिकेष की सुंदरता को आत्मसात करने के लिए बेहद जरूरी है।
    अच्छा लगा आपका विवरण..

    travelwithmanish.blogspot.com

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  5. खूब लिखा आपने प्रिती जी लगा मानोँ हम भी गँगा जी के दर्शन कर आये

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  6. mai to pichale 40 saalo se geeta bhawan ja raha hun. garmiyon me lagbhag 2 mahine wanhi rahataa hun. bahut sundar jagah hai. aapne rishikesh ka jo warnan kiya hai wo achha hai lekin bahut kuch likhane se rah gaya hai. triveni ghat aur sanatikunj ke alawa bahut kuchh hai wanhaa. jakar hee dekha ja saktaa hai. swargiy aanad ki anubhuti hoti hai rishikesh me.

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