23 मार्च 2011

याद कर लिया ऐसे की

आज सुबह एक लिफाफा आया ,
कुछ पुरानी पहचान की याद दे गया ,
खोला ,
एक कोरा कागज़ था ,
ऊपर मेरा नाम था ,
पूरा सफा बिना लिखा कुछ भी ,
नीचे एक नाम था ......
हलकेसे धुंधला सा चेहरा उभरा !!!!
पलक पर एक हलकी सी परत थी अश्क की .....
चुपकेसे फुसफुसाया और कहा ,
तुम्हे याद न करने इलज़ाम भी सर आँखों पर ,
क्योंकि तुम्हे भुला देने की खता ना कर पाए हम ....
ओज़ल आँखोंसे जो हो गए
पर दिलसे उसकी याद को ओज़ल ना कर पाए हम ........
मेरी आँखसे एक आंसू टपक गया ,
उसने अपने नाम पर धर लिया
अल्फाज़ जो लिखे थे फ़ैल गए कोरे सफे पर फिर से ,
उसमेसे मेरा नाम उभरा ....

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक कोरा कागज़ था,
    ऊपर मेरा नाम था,
    पूरा सफा बिना लिखा कुछ भी,
    नीचे एक नाम था ..
    हलकेसे धुंधला सा चेहरा उभरा !!!!....ye kuch khas lagi!!

    Jai Ho Mangalmay HO

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (24-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. मेरी आँखसे एक आंसू टपक गया ,
    उसने अपने नाम पर धर लिया
    kaya boloon......bas bemisaal...

    उत्तर देंहटाएं
  4. मेरी आँखसे एक आंसू टपक गया ,
    उसने अपने नाम पर धर लिया
    अल्फाज़ जो लिखे थे फ़ैल गए कोरे सफे पर फिर से ,
    उसमेसे मेरा नाम उभरा ....

    बहुत भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी रचना..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं

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