24 मार्च 2011

जिंदगी और सपना

सच कहूँ कभी जिंदगी सपना लगती है ,
और कभी सपनेमें जी लेती हूँ ,
चाहती हूँ जो भी कुछ सब मिलना मुमकिन नहीं ,
बस सपनेमें सब वो पा लेती हूँ ...
पर ये भी सच है ,
की मुझे ये वरदान लगा की
मेरी जिंदगी एक सपना नहीं
और सपना मेरी जिंदगी नहीं
जुदा है दोनों इस लिए दोनों प्यारे है ,
वर्ना ये जिंदगी कितनी अधूरी हो जाती !!!!!
मेरे सपनोंकी परी सिर्फ मुझे दिखती है ,
मेरे सपनो का डर सिर्फ मुझे सताता है ,
मेरे सपने मुझे हंसा देते है कभी
कभी कोई सपना मुझे रुलाता है ....
येही सपना मेरे जिंदगी का हौसला बन जाते है ,
मिलते है कभी रातों के नुक्कड़ पर बैठे हुए
और जिंदगी की राह को दिखाकर ओज़ल हो जाते है ,
मेरे बुलाने पर भी कभी लौट नहीं आते
पर जिंदगीकी डगर पर कोई अपना बन मिल जाते है ....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...