8 मार्च 2011

एक चाहत नारी की

एक औरत की चाह :
आज कहते कहते सुनना है अपनी मर्जीसे ,
आज चलते चलते रुकना है अपनी मर्जीसे ...
आज ख़ामोशीको गुनगुनाना है अपनी मर्जीसे ,
आज हँसते हँसते रोना है अपनी मर्जीसे ....
आज ढेरसे सपने देखने सोना है अपनी मर्जीसे ,
आज कुछ सपनों को पाना है जागते हुए अपनी मर्जीसे ...
रोज सूरज पहनाता है मुझे कई रिश्तोंके मुखौटे ,
आज रिश्तोंके सारे मुखौटे उतारकर सिर्फ प्रीति बनकर जीना है अपनी मर्जी से ....
दो साँसोंके बीच कुछ खाली जगहसे इस दिनमें
खुली सांस लेकर हर पल जीना है अपनी मर्जी से ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय महोदया , सादर प्रणाम

    आज आपके ब्लॉग पर आकर हमें अच्छा लगा.

    आपके बारे में हमें "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" पर शिखा कौशिक व शालिनी कौशिक जी द्वारा लिखे गए पोस्ट के माध्यम से जानकारी मिली, जिसका लिंक है......http://www.upkhabar.in/2011/03/vandana-devi-nutan-shikha-mamta-preeti.html

    इस ब्लॉग की परिकल्पना हमने एक भारतीय ब्लॉग परिवार के रूप में की है. हम चाहते है की इस परिवार से प्रत्येक वह भारतीय जुड़े जिसे अपने देश के प्रति प्रेम, समाज को एक नजरिये से देखने की चाहत, हिन्दू-मुस्लिम न होकर पहले वह भारतीय हो, जिसे खुद को हिन्दुस्तानी कहने पर गर्व हो, जो इंसानियत धर्म को मानता हो. और जो अन्याय, जुल्म की खिलाफत करना जानता हो, जो विवादित बातों से परे हो, जो दूसरी की भावनाओ का सम्मान करना जानता हो.

    और इस परिवार में दोस्त, भाई,बहन, माँ, बेटी जैसे मर्यादित रिश्तो का मान रख सके.

    धार्मिक विवादों से परे एक ऐसा परिवार जिसमे आत्मिक लगाव हो..........

    मैं इस बृहद परिवार का एक छोटा सा सदस्य आपको निमंत्रण देने आया हूँ. आपसे अनुरोध है कि इस परिवार को अपना आशीर्वाद व सहयोग देने के लिए follower व लेखक बन कर हमारा मान बढ़ाएं...साथ ही मार्गदर्शन करें.


    आपकी प्रतीक्षा में...........

    हरीश सिंह


    संस्थापक/संयोजक -- "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" www.upkhabar.in/

    ...

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