24 फ़रवरी 2011

उसने कहा ...

कभी शाम को ढलते सूरज को देख
याद आता है हर सुबह एक संध्या को छुपाकर आती है ,
सूरजको देखकर याद आता है ,
कुछ उम्मीदे देकर गया था ,
शाम को पूछता है कुछ हुआ या नहीं ???
कभी हाँ बोल कर सर हिलाते है ,
कभी ख़ामोशी से ना कह देते है ,
फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
कल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
    कल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......
    इसी उम्मीद के सहारे ज़िन्दगी गुजर जाती है…………बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  2. कल की सुबह पर विश्वास बना रहे , यह आस बनी रहे !

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