5 अक्तूबर 2009

बिखरना है मुझे एक बार फ़िर


आँख बंद की तेरे दीदार को ,

छूकर निकल गया वह भी तनहा छोड़ ....

==========================

शब्द बांधे कुछ

तुम तो सब अल्फाज़से परे नजर आए ....

==========================

धड़कन बनाकर रखा

दिल बस तुम्हे सुनता रहा ....

मेरी सदायें भूल गया ....

1 टिप्पणी:

  1. दिलचस्प, भाषिक बेफिक्री, अनुभवों की सांद्रता।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...