15 जुलाई 2009

महफिल

आपको मुबारक हो महफिलें

हमें हमारी तन्हाई मुबारक हो ...

किस जुबांसे करें बयां कि साथ क्यों छुटा ?

पूछा होता तो बता देते पंख कट गए है हमारे ....

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एक लंबा सफर तय किया था

एक लम्बी गुमनामी को झेला था

अब मंजिल सामने है खड़ी मेरे

तब क्यों ये लग रहा कि राह थी ग़लत चुनी ?

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बड़े हलके फुल्केसे लग रहे थे रुई से

आज मैंने बादलको निचोड़ कर देखा

उसकी ऊँची उड़ानके राज़ को जाना

ढूँढता था महबूबाको और आंसू थे भरे भरे ....

3 टिप्पणियाँ:

  1. किस जुबांसे करें बयां कि साथ क्यों छुटा ?

    पूछा होता तो बता देते पंख कट गए है हमारे ....

    kuch beete dardke saaye ubhar ke aagaye,sunder tino bhi bahut sunder.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं