5 नवंबर 2012

एक आरज़ू .............

रात एक रेशमीसा एहसास
हथेलीसे जैसे सरक रहा था ,
अधमुंदी आँखेसे एक कतरा कह रहा था ,
ये रेतसी मखमली ,रेशमसी मलमली .......
क्या है इस का नाम ???
एक आरज़ू .............
सुबह उठकर देखा तो सिरहाने पर ,
एक ढेर लगा हुआ पाया ,
सपनोका ...
जैसे मौसमकी ऑस
अभी गुलाबकी पंखुड़ीसे सरकी हुई ....,
ज़िलमिल सितारोंकी एक पोटली खुली .....
कुछ अधखिली कलियाँ ,
भीतर भौंरे की गूंज को छुपाये !!!!!!
चुंटी  काटकर देखी खुदको ....
नहीं ये सपना नहीं था ....
रात एक रेशमी एहसास सिरहाने बैठ ,
गुदगुदा रहा था ...चांदनीमें चमकती बालूसा .....

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...