17 सितंबर 2012

आगे आने वाले दिनों की एक झलक

दो दिनसे अख़बारकी एक खबरने दिलो दिमाग पर हलचल मचा दी है ...वो ये है की रसोई गेसकी सिर्फ छ सिलेंडर सबसिडीके दामों पर मिलेगी ...तो मुझे वो सुनहरे दिन याद आने लगे ..पचास रूपये में ढाई लीटर पेट्रोल भरवाती थी ..और चालीस रूपये में पुरे दस दिनकी सब्जी आती थी ...बारह रूपये एक लीटर दूध मिलता था ....अब तो पांच दिनकी सब्जी सौ रूपये खा जाती है और पैतीस रुपये होने जा रहा है ....पेट्रोल की तो पूछो मत ...
तो आगे आने वाले दिनों की एक झलक :
लोग सिर्फ पब्लिक ट्रांसपोर्टका प्रयोग कर रहे है ..और उसमे भीड़ के कारन पैदल चलने का चलन बढ  गया है ..सड़के खाली दिख रही है ....प्राइवेट वाहन जो नहीं चल रहे है ....सायकलकी बिक्री देशका सबसे बड़ा कर प्राप्त करने का साधन बन चूका है ....लोग अब पत्ते और घासफूस खाना वो भी कच्चा ही शुरू कर चुके है ...ताकत बढ़ गयी है पैदल चलने की कसरत से और सब दुबले पतले है घासफूस खाने के कारन ...गेस सिलेंडरकी जरुरत ही नहीं पड़ती ..सोलर का चलन बढ़ गया है .......
पता नहीं अब सांस लेने पर भी टेक्स न लग जाए !!!! एक आम आदमी ख़ुदकुशी कर ले उसके लिए एक प्लेटफोर्म बन चूका है .....अब ऐसा दिन भी दूर नहीं जब इंसान सिर्फ एक बार खायेगा और एक बार नहायेगा ...और जंगल ढूंढेगा घासफूस के चक्कर में ....और हम जहाँ से शुरू हुए थे वहां पर पहुँच जायेगे ...!!!!!!

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