4 सितंबर 2012

भगवानसे मुलाकात हो गयी ...

बड़ी अजीबसी एक बात कल हो गयी ,
मेरी भगवानसे मुलाकात हो गयी ...
वो खिड़कीमें बैठकर कांच के पार ताक रहे थे ,
ऊपर गगनकी खिड़कीसे झांक रहे थे .....
बहुत तनहा उनको महसूस हो रहा था ,
स्टाफ उनका आज गुम  हो गया था .....
भगवान् पर बहुतसे फोन आते है ,
एक नामसे उन्हें कोई नहीं पुकारे है ...
अब भगवानको भी अपना नाम याद करना पड़ता है ,
बहुत सोच सोच कर हेलो कहना पड़ता है ....
सबको इतना सब कुछ देकर आये है इस दुनियामें ,
पता नहीं ये इंसान क्यों हर रोज नयी मांग पैदा करता है ???
संतुष्टि देना शायद भूल गये थे क्या ???
उन्होंने जांचा अपनी वहिखातेमें .....
इंसान जब बंट रही थी संतुष्टि तब पेड़ काटने गया था !!!!
अपनी कबर खुद ही खोदने गया था ....
भगवानने फोन लाइन के सारे प्लग खुद ही निकाल दिए ....
अब वो खिड़कीमें बैठकर तमाशे देखनेमें मशरूफ हो गए ......
अब तो सिर्फ दिलसे की गयी दुआ ही
उनके हॉट लाइन पर आती है ...
उनकी बिनती जो निस्वार्थ होगी उन्हें ही सुनी जाती है ...!!!!

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