28 अप्रैल 2012

वो तो सीपी ही है की....

जब मिली तू मुझे जिंदगी तू उजालोंमें मिली ,
तेरी रातका चेहरा अँधेरेमें देखने की ख्वाहिशोंमें 
तू तो सोडियम बत्तियोंकी जगमगाहटमें मिली ,
काले घने सायोंके बीच छुपे हुए एक उजालेमें मिली .....
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कौन कहता है की जो हम चाहते है वो नहीं मिलता ???
मिलता तो है पर जब चाहते ख़त्म हो जाती है तभी मिलता है !!!!
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सागरके खारे पानीसे प्यास कहाँ है बुझती ?
वो तो सीपी ही है की उससे मोती भी बना सकती है ....
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हमसे छुप जाने की हरकतसे हम भी है वाकिफ 
शायद तुम्हारे दिलमें वो घाव भरा नहीं 
ये घाव भले ही दिया था तुमने मेरे दिल पर 
पर प्यार गहरा था हमारा तो झख्म तुम्हारे दिल पर हुआ था .....

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