23 अप्रैल 2012

मजलूमके नाम ...

ये अल्फाजोंके उल्ज़े सुल्ज़े फितरे छोड़ जाती है दुनिया ,
उसके लिए जिसको महसूस करनेके लिए अल्फाज़ नाकाम होते है ......
================================================
प्यार करना है एक गुनाह दुनिया की नज़रमें 
फिर भी हर दौरमें इश्कमें फ़ना होने वालोकी  नयी दास्ताने लिखी जाती है ......
================================================
जिसको पाने की उम्मीद भी न हो दूर तक 
उससे प्यार करने की खता कर जाती है दुनिया ....
================================================
बेवफाई के अनगिनत इल्ज़ाम करके रुसवा करनेवाले भी है यहाँ ,
जो अपनी नाकामी को किसी मजलूमके नाम मढ़कर चले जाते है .....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...