1 फ़रवरी 2012

मेरा ही तो चैन था ......

आज मनके समंदरमें सपनोकी सीपियाँ चुनी ,
कुछ खाली खाली सी निकली ,
कुछ में मोती मिले ,
कुछ सीपीमें हवाएं कैद थी ,
और कुछ सीपी सपनोको कैद करके बैठी थी ....
उन्हें नदीके किनारे छोड़कर वापस आ गयी ,
ये सीपी जो सजावट और शृंगार है 
एक नदी का एक समुन्दरका 
वो उनके बिना अधूरे से ,
जिसकी नियामत थी 
उसे सौपने का सुकून भी मेरा ही तो चैन था ......

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