9 जनवरी 2012

कोई खुद तनहा है

बीते हुए लम्हों के लिए आज रोया नहीं करते ,
गुजरे हुए कल के लिए आजको खोया नहीं करते ...
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मेरी मुस्कुराहटोंके साथ देखा मैंने लोगोंका हुजूम भी ,
हैरत हुई मुझे जब मेरे गमके लम्होंमें कोई मेरे साथ नहीं था ....
सिखा एक सबक थाम लो उनका हाथ जिसके साथ गममें नहीं कोई ,
खुशियाँ बांटनेके लिए उसके साथ लोगोंका कारवां जरुर होगा ....
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कोई खुद तनहा है ,
किसीको तनहा छोड़ दिया किसीने ,
लेकिन वो तन्हाई थी जिसमे
मेरे साथ थे तुम ये सच जाना मैंने .....

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