14 दिसंबर 2011

प्यारके एहसासकी पहचानसी ...!!!!!

जिस दिन प्यारको समज गए
प्यार करना ही भूल गए ....
समजनेमें हर लम्हा गुजरता गया ...
और प्यार रूठकर लौट गया !!!!
जो हर दर्द हर ख़ुशीसे परे हो
उसे प्यार कहते है ...
जब गम और ख़ुशी तुम्हारे साथ रहने लगे ,
प्यारके लिए जगह कम हो जाती है ....
वो तो बहती हवा का झोंका है ,
उसे दिलकी सरहदें कहाँ रास आती है ????
उसका वास्ता तो आसमाँसे है ,
उसे दो गज जमींकी मोहताजी कहाँ ????
दो धडकनोंके बीच जो पूल बना है ,
वो उसका इबादतखाना है .....
बस ढूंढते रहे हर दम किसीकी आँखोंमें
किसीकी बातोंमें ,किसीके अश्क में या किसीकी हंसीमें !!!
प्यारने कभी ये तो बताया ही नहीं
की उसका ठिकाना कहाँ है !!!
हमेशा आधा अधुरा सा ही नज़र आया है
हर कोनेमें जाकर देख लो !!!!!
आँखोंको मींचकर देखा तो एक तस्वीर उभरकर आई है
दिलकी दीवारों पर तराशी हुई है चुपकेसे ,
शायद ये प्यार नहीं लगी ये प्यारके एहसासकी पहचानसी ...!!!!!

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