29 जुलाई 2011

गुलमहोर .....

एक रास्ता है ,


दोनों तरफ पेड़ गुलमहोरकी कतारें .....


थोड़ीसी धुप छन करके आती है ,


थोड़ीसी छाँव है ...


वो धुपकी किरन खड़ी है छाँवकी बाहोंमें ......


नीचे मैं ....


अनायास ही खड़ा ये खेल देखता हुआ ...


हाथमें एक टूटी हुई गुलमहोरकी डाली सहलाते हुए .......

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