3 जून 2011

कहीं तो कोई तो ...

कहीं तो कोई है जो दुआ बनकर आ जाता है ,
कोई तो है जो आपमें रहकर खुद को समाता है ,
वो अनदेखा चेहरा जिसकी तलाश रहती है उम्र भर ,
पर वो तो हमारे दिलमें ही धडकता जाता है ....
तलाश हमारी रूकती नहीं ,
कभी सामने किसी चेहरे को पाकर लगता है ,
हाँ ये वही है जो हममे छुपा है ,
उसे गर ये एहसास हो
तो ये रिश्ता रूहानी कहलाता है ....

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (04.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
    स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-“चाहत” (आरती झा)

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  2. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..

    उत्तर देंहटाएं

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