2 अप्रैल 2011

ओल ध बेस्ट धोनी ....

आज पता है सबके दिल में धोनी धड़क रहा है ....और सचिन सांस ले रहा है ...तो ये पोस्ट कौन पढ़ेगा ???? आज बीवीकी बनायीं सब्जीके बारेमें कोई कम्प्लेन नहीं होगी पर जब मिसफील्डिंग होगी तो शायद ये क्या किया ऐसे सब चिल्लायेंगे ....टी वी स्क्रीन पर देखते देखते टिप्पणी देना शायद आसान है पर उस बाईस गजके विकेट पर सामनेसे आ रहे गेंद का सामना सबसे मुश्किल ......
बस जिंदगी भी कुछ ऐसे ही होती है ना ??? हम एकदम आसान काम को नहीं करते पर किसी गुगली पर जो बड़े बड़े दिग्गजोंको समज ना आई हो उस पर छक्का मार सकते है ...जब जिंदगी क्रिकेटकी पिच पर बेट पकड़कर खड़ी होती है तब ग्यारह खेलाडी जैसी परिस्थितियां हमें घेरे खड़ी होती है ...एक चुक और हम आउट ....और इसके निर्णायक दो ग्राउंड पर होते है ...और दो ग्राउंड के बाहर ..हरपल को जांचा परखा जाता है और दुसरे लोग हमारे आउट या नोट आउट के निर्णय लेते है ....पर जिंदगीकी मेच में येही होता है ....जब शायद आधी से ऊपर की टीम पेवेलियन लौट चुकी हो और सारे दिग्गज खिलाडी आउट हो चुके हो तब कोई नया नौसिखिया खिलाडी बल्ला लेकर आता है और उसके बीस पच्चीस रन जीत का तोहफा दे जाते है ...जो काम दिग्गज की सदी नहीं कर पाती वो नन्हा सिपाही कर देता है ....और वो मेन ऑफ़ थे मेच हो जाता है .....क्यों ???? ये सवाल आज आप अपने आपसे जरूर पूछना ...
चलो अब जिंदगी की बोलिंग सीखते है ......अब जिंदगी सामने बेट लेकर खड़ी है ...और हमारी सारी शक्तियां हमारे सारे गुण अवगुण ग्यारह खिलाडी बनकर हमारे साथ होते है ....ये हमारे हाथमें होता है की ऐसी हालात पैदा करे की जिंदगीके सारे अवरोध हम क्लीन बोल्ड या हमारी कोई शक्ति के द्वारा केच आउट ,रन आउट ,एल बी दबल्यु ,या स्टंप आउट करा दे ....और जिंदगी का हर चेलेंज का हमारी शक्तियों का सही उपयोग करके काममें लाकर उसका ना सिर्फ सामना करे पर सारी मुश्किलोंको हराकर पेवेलियन वापस भेजे ....
हार हो या जीत हो जिंदगी भी एक खेल है पर उसे अंतिम ओवर तक खेलने की क्षमता ,खेलते रहने की क्षमता ,हार या जीत को ठन्डे दिमागसे पचाने की क्षमता ,हार से हमारी कमी को जानने की और सुधारने की क्षमता ,और जीत के नशेमें ना लड़खड़ाने की क्षमता ....ये क्रिकेट हमें सिखाता है ... जो लीग क्वार्टर सेमी और फायनल तक टिक जाता है वो ही सिकंदर कहलाता है .... ओल ध बेस्ट धोनी और उसके धुरंधर ............

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